नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने क्लास 12 के छात्रों के लिए CBSE द्वारा चलाए जा रहे ऑन‑स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल को फिर से खोलने की माँग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पोर्टल सभी उम्मीदवारों के लिए निश्चित अवधि में खुला था और पुनः खोलने से नई दावे उत्पन्न हो सकते हैं।

  • OSM पोर्टल सभी छात्रों के लिये सीमित अवधि में खुला था
  • सुप्रीम कोर्ट ने पुनः खोलने की निर्देश नहीं दिया
  • भविष्य में नए दावे रोकने के लिये यह निर्णय महत्वपूर्ण है

पृष्ठभूमि

बी.एस.ई (CBSE) ने क्लास 12 के उत्तर पत्रों की ऑन‑स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लागू किया, जहाँ शिक्षक स्कैन किए गए उत्तर पत्रों को कंप्यूटर पर अंक देते हैं। इस डिजिटल प्रक्रिया ने कई बार तकनीकी गड़बड़ियों, स्कैनिंग त्रुटियों और कुछ पृष्ठों के न स्कैन होने की शिकायतें उत्पन्न कीं।

मामले की रूपरेखा

एक समूह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने OSM पोर्टल को फिर से खोलने की माँग की, क्योंकि कई छात्रों का मानना था कि पोर्टल बंद होने के दौरान तकनीकी समस्याओं के कारण वे पुनः मूल्यांकन नहीं करा सके। याचिकाकर्ता ने केवल एक सप्ताह का अतिरिक्त समय माँगा, यह तर्क देते हुए कि वेबसाइट क्रैश हो गई थी।

अदालत का निर्णय

मुख्य न्यायाधीश सुर्ज कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि पोर्टल सभी उम्मीदवारों के लिये पहले से निर्धारित अवधि में खुला था और इसे पुनः खोलना नई दावों को जन्म दे सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "यदि आप बस नहीं पकड़ पाते, तो बस छूट जाता है।"

सीबीएसई की प्रतिक्रिया

सीबीएसई के प्रतिनिधि तुषार मेहता (सॉलिसिटर जनरल) ने बताया कि निर्धारित अवधि में 1.68 लाख छात्र सफलतापूर्वक आवेदन कर चुके थे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले समान चुनौती को खारिज कर दिया था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पिछले वर्षों में भी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर कई कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिसमें स्कैनिंग त्रुटियों और मानवीय निरीक्षण की कमी पर सवाल उठाए गए थे। इससे शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता और तकनीकी विश्वसनीयता पर चर्चा बढ़ी है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि इस निर्णय से न केवल छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा होगी, बल्कि भविष्य में डिजिटल परीक्षा प्रणालियों के नियमन में स्पष्ट दिशा-निर्देश स्थापित हो सकते हैं।

"डिजिटल मूल्यांकन के दायरे में न्यायिक निगरानी आवश्यक है, ताकि तकनीकी खामियों को न्यायसंगत समाधान मिल सके," प्रो. अंजली शर्मा, शिक्षा नीति विशेषज्ञ ने कहा।
Did You Know?: OSM प्रणाली 2020 में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर लागू की गई थी।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या छात्र अब भी अपनी उत्तरपत्रों की पुनः जाँच करा सकते हैं?

A: मौजूदा पोर्टल बंद हो चुका है; छात्र अपने स्कूल या बोर्ड के माध्यम से पारंपरिक पुनः जाँच प्रक्रिया का अनुसरण कर सकते हैं।

Q2: भविष्य में ऐसी तकनीकी समस्याओं को रोकने के लिये क्या कदम उठाए जाएंगे?

A: बोर्ड ने कहा है कि अगली परीक्षा चक्र में सिस्टम की क्षमता बढ़ाने और बैक‑अप विकल्प प्रदान करने के लिए अतिरिक्त उपाय किए जाएंगे।