बरेली के अल्ताफ की संघर्षपूर्ण कहानी ने सबको भावुक कर दिया है। पिता के साथ सड़क किनारे आलू बेचकर कोटा जाने का खर्च जुटाने वाले अल्ताफ ने आखिरकार आठवें प्रयास में NEET क्रैक कर लिया है।
- अल्ताफ ने 8वें प्रयास में NEET-2026 में 563 अंक हासिल किए।
- कोटा में पढ़ाई के लिए पिता के साथ सड़क किनारे आलू बेचकर पैसे जुटाए।
- भाई के सड़क हादसे ने उन्हें डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया।
- अल्ताफ की ऑल इंडिया रैंक 27,910 रही।
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के नवाबगंज कस्बे से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो दृढ़ संकल्प और अटूट इच्छाशक्ति का प्रमाण है। अल्ताफ, जो एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं, ने NEET-2026 की परीक्षा में सफलता हासिल कर समाज के सामने एक मिसाल पेश की है। यह सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि गरीबी और विपरीत परिस्थितियों के खिलाफ एक लंबी लड़ाई जीतने की कहानी है।
अल्ताफ का सफर आसान नहीं था। उनके पिता, इकबाल हुसैन अंसारी, सड़क किनारे आलू की फड़ लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक तंगी इतनी थी कि उच्च शिक्षा के लिए कोटा जाना एक सपना जैसा था। अल्ताफ ने शुरुआत में दोस्तों के नोट्स और ऑनलाइन लेक्चर के सहारे तैयारी की, लेकिन सही मार्गदर्शन की कमी उनके रास्ते का रोड़ा बनी रही। जब उन्होंने महसूस किया कि उन्हें पेशेवर कोचिंग की जरूरत है, तो उन्होंने खुद को और अपने परिवार को आर्थिक बोझ से बचाने के लिए एक कठिन रास्ता चुना।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि अल्ताफ की कहानी केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह भारत में ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए शिक्षा के असमान स्तर और कोचिंग संस्कृति की चुनौतियों को भी उजागर करती है। यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन और संसाधनों तक पहुंच कैसे किसी छात्र के भविष्य को बदल सकती है।
"अल्ताफ की जिद और संघर्ष यह साबित करता है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते।"
अल्ताफ के जीवन में एक मोड़ तब आया जब उनके बड़े भाई का देर रात मंडी से लौटते समय सड़क हादसा हो गया। इस दर्दनाक घटना ने अल्ताफ के मन में चिकित्सा क्षेत्र के प्रति एक गहरा जुनून पैदा कर दिया। उन्होंने ठान लिया कि वे डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करेंगे। 2019 में मात्र 323 अंकों से शुरुआत करने वाले अल्ताफ ने हार नहीं मानी और लगातार सात वर्षों तक संघर्ष करते रहे।
कोटा पहुँचने के बाद, उन्होंने एलन करियर इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया। कोचिंग की फीस भरने के लिए उन्होंने अपने पिता के साथ मिलकर सड़क किनारे आलू बेचने का काम किया। इस कठिन परिश्रम का परिणाम यह हुआ कि आठवें प्रयास में उन्होंने 563 अंक प्राप्त कर अपनी मंजिल पा ली।
Frequently Asked Questions
1. अल्ताफ ने NEET में क्या रैंक हासिल की?
अल्ताफ ने ऑल इंडिया रैंक 27,910 और OBC कैटेगरी में 13,437वीं रैंक हासिल की है।
2. अल्ताफ की सफलता का मुख्य कारण क्या रहा?
लगातार प्रयास, सही मार्गदर्शन (कोटा में कोचिंग) और अपने भाई के हादसे से मिली प्रेरणा उनकी सफलता के मुख्य स्तंभ रहे।