IIT दिल्ली ने एमएससी छात्र की संदिग्ध मृत्यु की जांच के लिए एक नई बाहरी समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता करेंगी। छात्रों के बढ़ते विरोध और पिछले अध्यक्ष के हटने के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है।
- पूर्व दिल्ली उच्च न्यायालय न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता नई जांच समिति की अध्यक्ष होंगी।
- एमएससी भौतिकी के छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु के बाद छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है।
- समिति में एम्स (AIIMS) के मनोरोग विभाग के प्रमुख प्रताप शरण भी शामिल होंगे।
- पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है और जांच जारी है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने अपने परिसर में एक एमएससी भौतिकी छात्र की संदिग्ध मृत्यु की जांच करने वाली बाहरी समिति का पुनर्गठन किया है। इस नई समिति की कमान दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता को सौंपी गई है। यह निर्णय तब लिया गया है जब संस्थान में छात्रों का विरोध प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी है और वे एक पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
इससे पहले, उत्तराखंड के पूर्व महानिदेशक (DGP) अशोक कुमार इस पैनल के अध्यक्ष थे, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए खुद को इस जिम्मेदारी से अलग कर लिया था। संस्थान के एक अधिकारी के अनुसार, नई समिति में एम्स (AIIMS), नई दिल्ली के मनोरोग विभाग के प्रमुख प्रताप शरण, दो छात्र प्रतिनिधि और आईआईटी दिल्ली के रजिस्ट्रार को भी शामिल किया गया है।
घटना का विवरण
यह दुखद घटना 22 अगस्त को हुई थी। प्रारंभिक पुलिस जांच के अनुसार, छात्र सुबह लगभग 8 बजे मुख्य द्वार से परिसर में दाखिल हुआ था। वह लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स (LHC) गया और वहां से छठी मंजिल पर पहुंच गया, जहां से उसने कथित तौर पर इमारत के सामने वाले हिस्से से छलांग लगा दी। छात्र को तुरंत संस्थान के अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है। समिति का पुनर्गठन संस्थान की विश्वसनीयता बनाए रखने और छात्रों के बीच बढ़ते अविश्वास को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम है।
संस्थान की पारदर्शिता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता ही इस संकट का एकमात्र समाधान है।
पुलिस ने इस मामले में एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment to suicide) का मामला दर्ज किया है। जांच दल ने छात्र की जेब से मिले मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है और तकनीकी विश्लेषण कर रहा है। साथ ही, पुलिस छात्र के काउंसलिंग रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए आईआईटी दिल्ली से संपर्क कर रही है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
IIT दिल्ली भारत के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में छात्र आत्महत्याओं के मामलों ने शैक्षणिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणालियों की आवश्यकता पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: नई जांच समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
उत्तर: समिति की अध्यक्षता मुक्ता गुप्ता करेंगी, जिसमें प्रताप शरण (AIIMS) और छात्र प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
प्रश्न 2: पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
उत्तर: पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है और मोबाइल फोन व अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।