पंजाब के सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों द्वारा की जा रही बुनियादी वर्तनी की गलतियों ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 'Deer' को 'Dear' और 'Vegetable' को 'Vegitable' लिखने जैसे मामले सालों से जारी हैं।
- पंजाब के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों द्वारा अंग्रेजी की बुनियादी वर्तनी (spelling) में भारी गलतियां की जा रही हैं।
- 2007 तक राज्य में अंग्रेजी शिक्षकों की कोई अलग भर्ती प्रक्रिया ही नहीं थी।
- हाल ही में शिक्षा मंत्री द्वारा साझा की गई तस्वीर ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
- विषय विशेषज्ञों की कमी के कारण अन्य विषयों के शिक्षक अंग्रेजी पढ़ाने को मजबूर हैं।
पंजाब के सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी शिक्षा की गुणवत्ता एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई है। हाल ही में, पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक तस्वीर ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस तस्वीर में कक्षा के भीतर लगे एक पोस्टर में 'Deer' (हिरण) को 'Dear' और 'Vegetables' (सब्जियां) को 'Vegitable' लिखा हुआ पाया गया, जिसने राज्य की शिक्षा व्यवस्था की जड़ों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
हालांकि यह मामला नया नहीं है, लेकिन यह पंजाब की शिक्षा प्रणाली की एक पुरानी और गहरी समस्या है। साल 2015 में भी जब कक्षा 10 के 80,000 से अधिक छात्र अंग्रेजी बोर्ड परीक्षा में फेल हो गए थे, तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने खुद शिक्षकों का टेस्ट लिया था। उस समय भी शिक्षकों ने 'vacant' को 'vacent' और 'should' को 'shuld' जैसे शब्दों में गलतियां की थीं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल वर्तनी की गलती नहीं है, बल्कि यह एक व्यवस्थित विफलता है। जब शिक्षक ही बुनियादी भाषा के नियमों से अनभिज्ञ हों, तो छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। पंजाब के हजारों छात्र प्रतिवर्ष IELTS जैसी परीक्षाओं के माध्यम से विदेश जाने का सपना देखते हैं, ऐसे में बुनियादी अंग्रेजी का अभाव उनके वैश्विक अवसरों को सीमित कर देता है।
शिक्षक की भाषा संबंधी अक्षमता सीधे तौर पर छात्र के सीखने की क्षमता और उनके करियर की संभावनाओं को प्रभावित करती है।
इस समस्या की जड़ ऐतिहासिक है। पंजाब में 2007 तक अंग्रेजी शिक्षकों की भर्ती के लिए कोई अलग कैडर (cadre) मौजूद नहीं था। इसका अर्थ यह था कि सामाजिक अध्ययन या पंजाबी के शिक्षकों को भी कक्षा 6 से 12 तक अंग्रेजी पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाती थी। यहाँ तक कि 2016 में एक इतिहास के शिक्षक ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था क्योंकि उन्हें जबरन अंग्रेजी पढ़ाने के लिए मजबूर किया जा रहा था।
वर्तमान 'आम आदमी पार्टी' सरकार ने इस दिशा में सुधार के प्रयास शुरू किए हैं। सरकार ने ब्रिटिश काउंसिल और अमेरिकी दूतावास के RELO जैसे संगठनों के साथ मिलकर शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई है। हालांकि, हालिया पदोन्नति नीतियों ने नए विवाद पैदा कर दिए हैं। 2024 में 301 शिक्षकों को अंग्रेजी लेक्चरर के रूप में पदोन्नत किया गया, जिनमें से 298 के पास अंग्रेजी में विशेषज्ञता का अभाव था।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पंजाब में अंग्रेजी शिक्षकों की कमी का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: ऐतिहासिक रूप से, पंजाब में 2007 तक अंग्रेजी शिक्षकों के लिए कोई अलग भर्ती कैडर नहीं था, जिससे अन्य विषयों के शिक्षकों को अंग्रेजी पढ़ाना पड़ता था।
प्रश्न 2: क्या सरकार शिक्षकों की अंग्रेजी सुधारने के लिए कुछ कदम उठा रही है?
उत्तर: हाँ, सरकार ब्रिटिश काउंसिल और अमेरिकी दूतावास के सहयोग से शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए विशेष कार्यक्रम चला रही है।