दमोदरम संजीवैया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (DSNLU) ने 'बियॉन्ड द बॉर्डर्स 2.0' कार्यशाला के माध्यम से छात्रों को अंतर्राष्ट्रीय कानून और कूटनीति में करियर की संभावनाओं से अवगत कराया।
- DSNLU के CILAD द्वारा 'बियॉन्ड द बॉर्डर्स 2.0' कार्यशाला का आयोजन किया गया।
- विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव और अंतर्राष्ट्रीय कानून विश्वविद्यालय, गोवा के प्रोफेसर ने मार्गदर्शन किया।
- 'द गाइड फॉर करियर इन इंटरनेशनल लॉ - वॉल्यूम 2' का औपचारिक विमोचन किया गया।
विशाखापत्तनम स्थित दमोदरम संजीवैया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (DSNLU) के सेंटर फॉर इंटरनेशनल लॉ एंड एलाइड डिसिप्लिन (CILAD) ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण एक-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का शीर्षक “बियॉन्ड द बॉर्डर्स 2.0: करियर एंड ट्रेंड्स इन इंटरनेशनल लॉ” था, जिसका मुख्य उद्देश्य कानून के छात्रों को वैश्विक कानूनी ढांचे और उसमें उभरते करियर के अवसरों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति प्रो. डी. सूर्य प्रकाश राव के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने अपने संबोधन में वैश्विक न्यायशास्त्र (Global Jurisprudence) के पेशेवर परिदृश्य को विस्तार देने और छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अंतर्राष्ट्रीय कानून विश्वविद्यालय, गोवा के प्रो. आर. वेंकट राव उपस्थित थे, जबकि भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) में संयुक्त सचिव (कानूनी और संधियाँ) वाई. उमा शंकर ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत जैसे विकासशील देशों के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानून की समझ केवल अकादमिक नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता है। जब छात्र कूटनीति, प्रत्यर्पण (Extradition) और अंतरराष्ट्रीय संधियों जैसे विषयों को गहराई से समझते हैं, तो वे वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिक सक्षम होते हैं। यह कार्यशाला पारंपरिक अदालती प्रैक्टिस से हटकर करियर के नए आयाम खोलने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
"विकासशील देशों में भारतीय संविधान और अंतर्राष्ट्रीय कानून का अंतर्संबंध छात्रों के लिए वैश्विक कानूनी विमर्श में सक्रिय रूप से शामिल होने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है।"
प्रो. उमा शंकर ने छात्रों को व्यावहारिक करियर पथों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून की डिग्री केवल वकालत तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और कानूनी सलाहकार के रूप में भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने प्रत्यर्पण जैसे वास्तविक दुनिया के उदाहरणों के माध्यम से इन जटिलताओं को समझाया।
कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण 'द गाइड फॉर करियर इन इंटरनेशनल लॉ - वॉल्यूम 2' का विमोचन रहा। यह पुस्तक भविष्य के कानूनी विशेषज्ञों के लिए एक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करेगी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में करियर बनाने की विस्तृत जानकारी दी गई है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'बियॉन्ड द बॉर्डर्स 2.0' कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य कानून के छात्रों को अंतर्राष्ट्रीय कानून के उभरते रुझानों और इस क्षेत्र में उपलब्ध विविध करियर विकल्पों से परिचित कराना था।
प्रश्न 2: कार्यशाला में किन प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया?
उत्तर: इसमें प्रो. आर. वेंकट राव (अंतर्राष्ट्रीय कानून विश्वविद्यालय, गोवा) और वाई. उमा शंकर (संयुक्त सचिव, विदेश मंत्रालय) ने मुख्य भूमिका निभाई।