जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में कुलपति शांतिश्री पंडित का कार्यकाल अनुशासन, भर्ती विवादों और जातिगत राजनीति के बीच संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। छात्र संघ के पदाधिकारियों को निष्कासित करने से लेकर भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाने तक, विश्वविद्यालय एक बड़े बदलाव के मोड़ पर खड़ा है।
- जेएनयू प्रशासन ने पहली बार छात्र संघ (JNUSU) के सभी चार निर्वाचित पदाधिकारियों को निष्कासित किया।
- कुलपति शांतिश्री पंडित पर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और जातिवादी टिप्पणी के आरोप लगे हैं।
- भर्ती के मामले में प्रशासन 200 से अधिक नियुक्तियों का दावा कर रहा है, जबकि शिक्षक संघ इसे संदिग्ध मान रहा है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) का इतिहास अक्सर छात्र आंदोलनों और प्रशासनिक टकरावों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के कार्यकाल में यह संघर्ष एक नए और जटिल स्तर पर पहुँच गया है। नवंबर 2025 में लाइब्रेरी में चेहरे की पहचान (facial recognition) तकनीक को लेकर शुरू हुआ विवाद जल्द ही फरवरी 2026 तक एक बड़े प्रशासनिक कदम में बदल गया, जब विश्वविद्यालय ने JNUSU के सभी चार निर्वाचित पदाधिकारियों को दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर दिया। यह जेएनयू के इतिहास में पहली बार था जब एक प्रशासनिक आदेश ने पूरी निर्वाचित छात्र परिषद को भंग कर दिया।
प्रशासनिक सख्ती केवल निष्कासन तक सीमित नहीं है। 2023 में प्रशासनिक भवन के पास विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध और भारी जुर्माने ने छात्र राजनीति के स्वरूप को बदल दिया है। छात्रों का कहना है कि बढ़ते निगरानी तंत्र (surveillance) ने परिसर के दैनिक कामकाज और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को प्रभावित किया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जेएनयू में हो रहे ये घटनाक्रम केवल एक विश्वविद्यालय के आंतरिक मामले नहीं हैं, बल्कि यह भारत के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में 'अनुशासन बनाम असहमति' के बीच चल रहे व्यापक संघर्ष का प्रतिबिंब हैं। प्रशासन का नियंत्रण और छात्रों की स्वायत्तता के बीच का यह टकराव भविष्य की शैक्षणिक नीतियों को आकार देगा।
जेएनयू में बढ़ता प्रशासनिक नियंत्रण और छात्र संघ का दमन लोकतांत्रिक संवाद के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करता है।
भर्ती के मुद्दे पर, कुलपति ने रिकॉर्ड तोड़ नियुक्तियों का दावा किया है। प्रशासन के अनुसार, फरवरी 2022 से अब तक 400 से अधिक साक्षात्कार हुए और 200 से अधिक पदों को भरा गया, जिसमें 70% नियुक्तियां आरक्षित श्रेणियों से हुई हैं। हालांकि, JNUTA (शिक्षक संघ) ने इन दावों को चुनौती देते हुए आरोप लगाया है कि योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर नियमों के विरुद्ध नियुक्तियां की जा रही हैं।
जातिगत राजनीति के मोर्चे पर भी विवाद कम नहीं हैं। फरवरी 2026 में एक पॉडकास्ट के दौरान पंडित की 'विक्टिम कार्ड' (victim card) वाली टिप्पणी ने तूल पकड़ लिया, जिसे छात्रों ने जातिवादी माना। हालांकि पंडित ने खुद को 'बहुजन' बताते हुए इन आरोपों को खारिज किया, लेकिन मामला अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पास लंबित है।
Frequently Asked Questions
1. जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों को क्यों निकाला गया?
प्रशासन ने अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए निर्वाचित पदाधिकारियों को निष्कासित किया था।
2. भर्ती विवाद का मुख्य कारण क्या है?
शिक्षक संघ का आरोप है कि यूजीसी मानदंडों को दरकिनार कर कुछ उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में अनुचित लाभ दिया गया है।