एंड्रा विश्वविद्यालय के उप-कुलपति जी.पी. राजसेखर ने शिक्षक दिवस समारोह में शिक्षा सुधारों को दार्शनिक सोच से जोड़ने की जरूरत पर ज़ोर दिया। एसआरएम‑एपी विश्वविद्यालय ने उत्कृष्ट फैकल्टी को सम्मानित किया।
- वीसी ने शिक्षा सुधारों में दार्शनिक विचारधारा का महत्व बताया।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ ‘अभेद’ सिद्धांत को जोड़ा गया।
- उत्कृष्ट फैकल्टी को पुरस्कार देकर शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित किया गया।
अध्यापक दिवस 2026 के अवसर पर एसआरएम‑एपी विश्वविद्यालय ने एक विशेष समारोह आयोजित किया, जिसमें एंड्रा विश्वविद्यालय के उप-कुलपति जी.पी. राजसेखर ने मुख्य भाषण दिया। उन्होंने शिक्षा सुधारों को समाज की बदलती ज़रूरतों के साथ तालमेल बिठाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
राजसेखर ने डॉ. सर्वेपल्ली राधाकृष्णन की ‘अभेद’ अवधारणा को उद्धृत करते हुए कहा कि इस विचार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में नयी राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क के साथ एकीकृत किया जा सकता है। उनका मानना है कि दार्शनिक सोच न केवल सिद्धांत को सुदृढ़ करती है बल्कि व्यावहारिक परिवर्तन को भी गति देती है।
Historical Background
भारत में शिक्षा सुधार का इतिहास स्वतंत्रता के बाद से कई चरणों में विकसित हुआ है। 1986 की राष्ट्रीय शैक्षिक नीति से लेकर 2020 की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति तक, प्रत्येक चरण ने सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों को प्रतिबिंबित किया है। राधाकृष्णन के विचारों ने शैक्षणिक विचारधारा में गहरी जड़ें जमा रखी हैं, जो आज भी नीति निर्माण में प्रभावी हैं।
समारोह में एसआरएम‑एपी विश्वविद्यालय के उप-कुलपति छ. सतिश कुमार ने भी राधाकृष्णन की शिक्षण‑शिक्षा में गहरी छाप को याद किया और बताया कि शिक्षक कैसे छात्रों के बौद्धिक विकास को आकार देते हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यदि शिक्षा सुधार दार्शनिक मूल्यों के साथ जुड़ें तो वे अधिक स्थायी और सामाजिक रूप से समावेशी बनेंगे, जिससे भारत की युवा पीढ़ी को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी।
"शिक्षा नीति में दार्शनिक अंतर्दृष्टि को सम्मिलित करना न केवल ज्ञान की गहराई बढ़ाता है, बल्कि सामाजिक समानता को भी सुदृढ़ करता है," प्रो. अनीता शर्मा, शैक्षिक नीति विशेषज्ञ ने कहा।
समारोह में उत्कृष्ट फैकल्टी पुरस्कार 2026 नौ शिक्षकों को प्रदान किए गए, जिनमें एआई, मशीन लर्निंग, मनोविज्ञान, सतत निर्माण, नेटवर्क सुरक्षा, कंप्यूटर विज़न, पर्यावरण विज्ञान और नवीनीकृत ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के शोधकर्ता शामिल थे। डॉ. वी.एम. मणिकंदन को एआई और छात्र मार्गदर्शन में उनके योगदान के लिए विशेष सम्मान मिला।
Frequently Asked Questions
Q1: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में ‘अभेद’ सिद्धांत को कैसे लागू किया जा सकता है?
A: नीति निर्माताओं को दार्शनिक मूल्यों को पाठ्यक्रम, मूल्यांकन और शिक्षक प्रशिक्षण में एकीकृत करना होगा।
Q2: इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं के प्रमुख शोध क्षेत्रों क्या थे?
A: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सतत निर्माण, नेटवर्क सुरक्षा, कंप्यूटर विज़न और नवीनीकृत ऊर्जा प्रमुख थे।