सम्माक्का सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (SSCTU) ने शैक्षणिक उत्कृष्टता की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए IIT-हैदराबाद और TISS के साथ नए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। इस पहल से जनजातीय छात्रों को देश के शीर्ष संस्थानों का अनुभव मिलेगा।
- IIT-हैदराबाद और TISS ने SSCTU के साथ मिलकर नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए हैं।
- नौ राज्यों के 105 से अधिक छात्रों ने इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्टूबर में विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर की आधारशिला रखेंगे।
तेलंगाना के मुलुगु स्थित सम्माक्का सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (SSCTU) ने शैक्षणिक क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए, विश्वविद्यालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद (IIT-H) और टाटा संस्थान सामाजिक विज्ञान (TISS), हैदराबाद के साथ मिलकर विशेष सहयोगी कार्यक्रम शुरू किए हैं।
जक्कराम स्थित विश्वविद्यालय के ट्रांजिट परिसर में आयोजित एक भव्य इंडक्शन कार्यक्रम के दौरान, नौ अलग-अलग राज्यों के 105 से अधिक छात्रों का औपचारिक स्वागत किया गया। यह कार्यक्रम न केवल छात्रों के लिए एक नई शुरुआत है, बल्कि जनजातीय समुदायों के लिए उच्च स्तरीय शिक्षा के द्वार खोलने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम भी है।
शैक्षणिक सशक्तिकरण की नई लहर
कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए, IIT-H के निदेशक बी.एस. मूर्ति ने कहा कि संस्थान शिक्षण, सीखने की प्रक्रियाओं और बुनियादी ढांचे की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए SSCTU को पूर्ण समर्थन प्रदान करेगा। उन्होंने इस व्यवस्था को एक 'अद्वितीय पहल' बताया, क्योंकि IIT-H के संकाय सदस्य सीधे तौर पर एक अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी लेंगे।
IIT-H के संकाय द्वारा सीधे शिक्षण प्रदान करना एक ऐसा मॉडल है जो भारत में अंतर-संस्थागत सहयोग की नई परिभाषा लिखेगा।
SSCTU के कुलपति वाई.एल. श्रीनिवास ने इन साझेदारियों को विश्वविद्यालय के विकास के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि IIT-H और TISS के साथ सहयोग से छात्रों को न केवल समकालीन ज्ञान मिलेगा, बल्कि उनकी रोजगार क्षमता (Employability) भी बढ़ेगी, जिससे वे बदलते पेशेवर परिवेश के लिए तैयार हो सकेंगे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस प्रकार के सहयोग भारत के हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बीच 'ज्ञान के अंतर' (Knowledge Gap) को पाटने के लिए महत्वपूर्ण हैं। जब IIT जैसे तकनीकी दिग्गज और TISS जैसे सामाजिक विज्ञान विशेषज्ञ एक साथ आते हैं, तो यह जनजातीय छात्रों को तकनीकी कौशल और सामाजिक संवेदनशीलता का एक अनूठा मिश्रण प्रदान करता है।
एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए, कुलपति श्रीनिवास ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अक्टूबर में विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर के लिए आधारशिला रखने की संभावना है। इससे इस उभरते हुए संस्थान को एक स्थायी पहचान और मजबूती मिलेगी। TISS हैदराबाद के निदेशक असीम प्रकाश ने भी छात्रों को अनुशासन और निरंतर सीखने के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: SSCTU और IIT-H के बीच सहयोग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य जनजातीय छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी और सामाजिक शिक्षा प्रदान करना और उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाना है।
प्रश्न 2: विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर कब शुरू होगा?
उत्तर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अक्टूबर में इसकी आधारशिला रखे जाने की संभावना है।