नल्लोर जिले के थरुनावयी गाँव में लैंको के अधूरे भवनों को पूरा कर संगम आईटीआई को स्थानांतरित करने की योजना बनी है। इस कदम से छात्रों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि की उम्मीद है।
- संगम आईटीआई को लैंको के अधूरे भवनों में शिफ्ट करने की योजना
- निर्माण पूरा करने के लिए अनुमानित लागत 8 करोड़ रुपये
- सीएसआर फंडिंग के माध्यम से फेज‑1 को तेज़ किया जाएगा
संगम आईटीआई वर्तमान में आत्मकुर में सरकारी पॉलिटेक्निक भवन में कार्यरत है, जहाँ 120 छात्र और 11 शिक्षक पढ़ा‑सिखा रहे हैं। नल्लोर कलेक्टर हिमांशु शुक्ला ने थरुनावयी गाँव के लैंको के अधूरे भवनों का निरीक्षण किया और निर्माण पूरा होने पर आईटीआई को वहाँ स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा।
यह प्रस्ताव एंडोवमेंट्स मंत्री अनाम रामनारायण रेड्डी, जो स्थानीय विधायक भी हैं, की मांग पर आया। कलेक्टर ने भवनों में बिजली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और इन कार्यों के लिए प्रारंभिक अनुमान 8 करोड़ रुपये बताया।
निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा करने के लिए कलेक्टर ने उद्योग के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंडिंग को आकर्षित करने का सुझाव दिया। इस पहल से न केवल प्रथम चरण का खर्च कम होगा, बल्कि संस्थान के छात्रों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।
Historical Background
आंध्र प्रदेश में इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (ITI) का इतिहास 1950 के दशक से शुरू होता है, जब राज्य ने कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए कई तकनीकी संस्थान स्थापित किए। नल्लोर जिले में पहले से ही कई तकनीकी संस्थान हैं, लेकिन बढ़ती उद्योग मांग के कारण अतिरिक्त सुविधाओं की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that relocating Sangam ITI to a purpose‑built campus will bridge the skill‑gap in the rapidly industrializing Nellore region, attracting more private investment and enhancing employability for local youth.
"सही बुनियादी ढाँचा ही तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता को तय करता है," कहा उद्योग विशेषज्ञ राजेश कुमार ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: शिफ्ट होने के बाद छात्रों को कौन‑सी नई सुविधाएँ मिलेंगी?
उत्तर: नई कैंपस में आधुनिक प्रयोगशालाएँ, कार्यशालाएँ, और बेहतर छात्रावास सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
प्रश्न 2: इस परियोजना के लिए फंडिंग का स्रोत क्या होगा?
उत्तर: प्राथमिक रूप से CSR फंडिंग, साथ ही राज्य सरकार की अतिरिक्त सहायता की संभावना है।