कर्नाटक सरकार द्वारा आरक्षण के पुराने आंकड़ों पर वापस लौटने के फैसले के कारण अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित चिकित्सा सीटों की संख्या में भारी गिरावट आई है। यह बदलाव आरक्षण के कानूनी विवादों और उच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई के बीच आया है।
- कर्नाटक में SC आरक्षण 17% से घटकर 15% और ST आरक्षण 7% से घटकर 3% हो गया है।
- 2026-27 शैक्षणिक वर्ष के लिए ST चिकित्सा सीटों की संख्या 392 से घटकर मात्र 182 रह गई है।
- मामला वर्तमान में कर्नाटक उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
बेंगलुरु: कर्नाटक में आरक्षण के ढांचे में हुए बदलावों ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों पर संकट खड़ा कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा आरक्षण के पुराने आंकड़ों (Quantum) को फिर से लागू करने के निर्णय के बाद, चिकित्सा महाविद्यालयों में इन समुदायों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
आरक्षण के आंकड़ों में बड़ा बदलाव
आंकड़ों का विश्लेषण करने पर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आती है। शैक्षणिक वर्ष 2025-2026 में, कुल 5,609 सरकारी सीटों में से SC के लिए 953 और ST के लिए 392 सीटें आरक्षित थीं। हालांकि, 2026-2027 के लिए यह संख्या घटकर SC के लिए 906 और ST के लिए केवल 182 रह गई है। यह गिरावट मुख्य रूप से आरक्षण के प्रतिशत में की गई कटौती का परिणाम है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्ष 2022 में, तत्कालीन भाजपा सरकार ने एच.एन. नागमोहन दास आयोग की सिफारिशों के आधार पर 'कर्नाटक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (शैक्षिक संस्थानों और सेवाओं में नियुक्तियों या पदों के आरक्षण) अधिनियम, 2022' लागू किया था। इसके तहत SC के लिए आरक्षण 17% और ST के लिए 7% कर दिया गया था। हालांकि, इस कदम से कुल आरक्षण 56% हो गया था, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50% की सीमा का उल्लंघन करता था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल सीटों की संख्या का मामला नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और भविष्य के पेशेवरों के निर्माण से जुड़ा है। आरक्षण में यह कमी न केवल चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच को सीमित करती है, बल्कि समुदायों के बीच एक बड़े शैक्षिक अंतराल को भी जन्म दे सकती है।
आरक्षण की यह कमी उन छात्रों के लिए अन्याय है जो जनसंख्या के अनुपात में अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
वर्तमान में, मामला कर्नाटक उच्च न्यायालय में लंबित है। सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण वृद्धि के खिलाफ चल रहे मामलों को देखते हुए पुराने मानदंडों को वापस लिया है। अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री टी. रघुमूर्ति ने कहा कि सरकार उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रही है और वे इस मामले में अनुकूल निर्णय की उम्मीद करते हैं।
Frequently Asked Questions
1. कर्नाटक में आरक्षण का प्रतिशत क्यों बदला गया?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50% की अधिकतम सीमा का उल्लंघन होने और उच्च न्यायालय में चल रही कानूनी चुनौतियों के कारण सरकार ने पुराने आरक्षण मानदंडों को अपनाया है।
2. इससे छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस बदलाव से विशेष रूप से ST समुदाय के छात्रों के लिए चिकित्सा सीटों की संख्या में लगभग 50% से अधिक की कमी आई है, जिससे प्रतिस्पर्धा और कठिन हो जाएगी।