रायचूर के कक्षा के संगीत समूह ने 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 के बीच बेंगलुरु में आयोजित KVS ज़ोनल स्तर के प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार जीता। प्रशिक्षक पारस पांडे और प्रधानाचार्य एस. दीपाश्री की मार्गदर्शन में यह टीम राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए दिल्ली में भेजी जाएगी।

  • रायचूर टीम ने ज़ोनल स्तर पर पहला स्थान हासिल किया।
  • संगीत शिक्षक पारस पांडे और प्रधानाचार्य एस. दीपाश्री की दिशा में यह उपलब्धि।
  • टीम राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दिल्ली में भाग लेगी।

केंद्रीय विद्यालय रायचूर ने 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक बेंगलुरु के PM SHRI Kendriya Vidyalaya MEG और सेंटर में आयोजित KVS ज़ोनल स्तर के EBSB और कला उत्सव में ‘इंस्ट्रूमेंटल म्यूज़िक ग्रुप (फोल्क/क्लासिकल)’ श्रेणी में पहला पुरस्कार जीतकर अपनी शैक्षणिक और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया।

प्रतियोगिता में पाँच KVS क्षेत्रों – बेंगलुरु, चेन्नई, एर्नाकुलम, भुवनेश्वर और हैदराबाद – के प्रतिनिधि टीमों ने हिस्सा लिया। रायचूर टीम, जो बेंगलुरु क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती है, ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, स्कूलों की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ न केवल विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं, बल्कि क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संगीत परंपराओं को भी प्रोत्साहित करती हैं। यह जीत केंद्रीय विद्यालयों के लिए एक मिसाल पेश करती है कि कैसे संगीत शिक्षा को स्कूल पाठ्यक्रम में समाहित किया जा सकता है।

“रायचूर की यह उपलब्धि दिखाती है कि सही मार्गदर्शन और समर्पण से छोटे शहरों के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।” – डॉ. नीलम राधाकृष्णन, संगीत शिक्षा विशेषज्ञ।
क्या आप जानते हैं?: 2024 में KVS ने 12 अलग-अलग कलात्मक श्रेणियाँ जोड़कर अपने प्रतियोगिता कार्यक्रम का विस्तार किया, जिससे अधिक छात्रों को अपनी कला दिखाने का अवसर मिला।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या यह जीत राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए स्वचालित पात्रता देती है?

हाँ, ज़ोनल स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद, रायचूर टीम को दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय KVS कला उत्सव में भाग लेने के लिए चुना गया है।

2. प्रतियोगिता में कौन से वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन हुआ?

प्रतियोगिता में मुख्यतः क्लासिकल और फोल्क संगीत वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें सितार, हारमोनियम, तबला और वायोलिन प्रमुख थे।