धारवाड़ में आयोजित एक विशेष व्याख्यान के दौरान, प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. जॉन इबेनेज़र ने छात्रों के लिए 'समग्र शिक्षा' (Holistic Education) की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने तकनीक के कारण बढ़ते मानसिक तनाव और शारीरिक निष्क्रियता के प्रति आगाह किया है।

  • छात्रों को मानसिक, शारीरिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाना आवश्यक है।
  • तकनीक के बढ़ते प्रभाव से छात्रों में मानसिक तनाव और नशीले पदार्थों की लत का खतरा बढ़ रहा है।
  • शिक्षकों की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं, बल्कि मूल्यों के विकास तक होनी चाहिए।

धारवाड़, कर्नाटक: कर्नाटक विश्वविद्यालय धारवाड़ (KUD) के सीनेट हॉल में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में शिक्षा के बदलते स्वरूप पर गंभीर चर्चा की गई। प्रोफेसर एस. राधाकृष्णन और डॉ. डी.सी. पावाटे मेमोरियल व्याख्यान के दौरान, बेंगलुरु के प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. जॉन इबेनेज़र ने एक महत्वपूर्ण आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के युग में केवल 'डोमेन नॉलेज' या विषय का ज्ञान पर्याप्त नहीं है; छात्रों को मानसिक, शारीरिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से सशक्त बनाने की आवश्यकता है।

डॉ. इबेनेज़र ने आधुनिक जीवनशैली और तकनीक के दोहरे प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "तकनीक ने शिक्षा में क्रांति ला दी है और सीखने की प्रक्रिया को आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही छात्रों में मानसिक तनाव और विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों के प्रति आकर्षण भी बढ़ा है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा को छात्र-केंद्रित और समग्र होना चाहिए ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर शिक्षा प्रणाली अब केवल ग्रेड और परीक्षाओं से हटकर 'वेलबीइंग' (Well-being) की ओर बढ़ रही है। डॉ. इबेनेज़र का बयान उस बढ़ते संकट को दर्शाता है जहाँ डिजिटल निर्भरता छात्रों के शारीरिक विकास और मानसिक स्थिरता को बाधित कर रही है।

छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए शारीरिक गतिविधि और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि आर.एच. गुनाकी ने पूर्व कुलपति डॉ. डी.सी. पावाटे के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे एक साधारण परिवार से निकलकर डॉ. पावाटे ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययन किया और एक महान गणितज्ञ और प्रशासक के रूप में वैश्विक पहचान बनाई। उन्होंने विश्वविद्यालय में बॉटनिकल गार्डन और छात्र छात्रावासों जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं की स्थापना में उनके योगदान को याद किया।

कर्नाटक विश्वविद्यालय के कुलपति ए.एम. खान ने भी डॉ. पावाटे के योगदान को याद करते हुए शिक्षकों से विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सहयोग की अपील की। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त 13 शिक्षकों को सम्मानित भी किया गया और 'डॉ. डी.सी. पावाटे एज़ एन एडमिनिस्ट्रेटर' नामक पुस्तक का विमोचन किया गया।

Historical Background

डॉ. डी.सी. पावाटे का नाम कर्नाटक के शैक्षिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। एक दूरस्थ गाँव से निकलकर गणित के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने वाले पावाटे ने न केवल शैक्षणिक बल्कि प्रशासनिक उत्कृष्टता का भी परिचय दिया। उनके द्वारा स्थापित संस्थान आज भी छात्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

Frequently Asked Questions

1. 'समग्र शिक्षा' (Holistic Education) से क्या तात्पर्य है?
इसका अर्थ है ऐसी शिक्षा जो केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न होकर छात्र के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास पर ध्यान केंद्रित करती है।

2. डॉ. इबेनेज़र ने तकनीक के बारे में क्या चेतावनी दी?
उन्होंने कहा कि तकनीक ने शिक्षा को आसान तो बनाया है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग से छात्रों में मानसिक तनाव और अन्य बुराइयों का खतरा बढ़ गया है।

Did You Know?: डॉ. डी.सी. पावाटे ने गणित पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी थीं, जो आज भी छात्रों के लिए मार्गदर्शक हैं।