बार-बार हो रहे पेपर लीक और प्रशासनिक विफलताओं ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल सुधार पर्याप्त नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को बदलने की जरूरत है।
- NTA के गठन का उद्देश्य पारदर्शिता लाना था, लेकिन अब यह स्वयं विवादों के केंद्र में है।
- बार-बार पेपर लीक और परीक्षाओं के रद्द होने से लाखों छात्रों का भविष्य अधर में है।
- विशेषज्ञ कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं और परीक्षा के स्वरूप में बदलाव की वकालत कर रहे हैं।
वर्ष 2017 में, भारत सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की स्थापना एक ऐसे संस्थान के रूप में की थी, जो देश की सबसे बड़ी और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी और मानकीकृत तरीके से आयोजित कर सके। पेपर लीक और धांधली के पुराने इतिहास को देखते हुए, NTA को एक भरोसेमंद व्यवस्था के रूप में पेश किया गया था। हालांकि, आठ साल बाद, वही एजेंसी आज एक गहरे 'विश्वास के संकट' से जूझ रही है।
हाल ही में हुए मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) के पेपर लीक ने देशव्यापी आक्रोश को जन्म दिया, जिसके परिणामस्वरूप लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी। इस संकट ने न केवल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया, बल्कि राजनीतिक उथल-पुथल भी मचाई, जिससे अंततः केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। सरकार ने सुधार के लिए नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय कार्यबल का गठन किया है, लेकिन छात्रों के बीच 'डेजा वू' (पुराने अनुभवों की पुनरावृत्ति) की भावना अधिक है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि यह भारत की जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) के लिए एक बड़ा खतरा है। जब लाखों युवा अपनी पूरी तैयारी और जमा-पूंजी एक अनिश्चित परीक्षा प्रणाली पर लगा देते हैं, तो प्रणाली की विफलता सीधे तौर पर देश की उत्पादकता और सामाजिक स्थिरता को प्रभावित करती है।
डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ, अब हमें बुनियादी ढांचे को अपग्रेड कर पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं की ओर बढ़ना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है। SGT यूनिवर्सिटी के प्रमुख बीजे राव के अनुसार, NTA की सबसे बड़ी कमजोरी उसके कर्मचारियों की संरचना है। एजेंसी के 221 कर्मचारियों में से केवल 24 ही स्थायी हैं। अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों में संस्थान के प्रति 'अपनेपन' की कमी होती है, जो प्रबंधन और निगरानी को प्रभावित करती है।
शिक्षाविदों ने परीक्षा के डिजाइन में भी बदलाव का सुझाव दिया है। केशाव अग्रवाल का मानना है कि NEET जैसी परीक्षाओं को इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तरह दो चरणों में और कंप्यूटर आधारित बनाया जाना चाहिए। वहीं, ब्राउन यूनिवर्सिटी की यामिनी अय्यर का सुझाव है कि भारत को पश्चिमी देशों की तरह बहु-अवधि परीक्षा प्रणाली अपनानी चाहिए, ताकि यदि एक परीक्षा विफल हो जाए, तो छात्रों का पूरा वर्ष बर्बाद न हो।
| विशेषता | वर्तमान प्रणाली (NTA) | प्रस्तावित सुधार |
|---|---|---|
| परीक्षा का माध्यम | कागज आधारित/मिश्रित | पूर्णतः कंप्यूटर आधारित (CBT) |
| कर्मचारी संरचना | मुख्यतः अनुबंध आधारित | स्थायी शैक्षणिक विशेषज्ञों की नियुक्ति |
| परीक्षा का स्वरूप | एकल उच्च-दांव परीक्षा | बहु-चरणीय और बहु-अवधि विकल्प |
छात्रों की पीड़ा वास्तविक है। 17 वर्षीय परी और 23 वर्षीय मानसी बंसल जैसे हजारों छात्रों के लिए, परीक्षा का रद्द होना केवल एक सूचना नहीं, बल्कि उनके जीवन के अनमोल महीनों और हजारों रुपयों की बर्बादी है।
Frequently Asked Questions
1. NTA का मुख्य कार्य क्या है?
NTA भारत में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं जैसे NEET और UGC-NET का आयोजन करती है।
2. विशेषज्ञ परीक्षा प्रणाली में क्या बदलाव चाहते हैं?
विशेषज्ञ कंप्यूटर आधारित परीक्षा, स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति और बहु-चरण परीक्षा मॉडल की मांग कर रहे हैं।