आंध्र विश्वविद्यालय ने शिक्षा में जेनरेटिव एआई के उपयोग पर एक पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य नैतिक मूल्यों और NEP 2020 के साथ आधुनिक तकनीक का एकीकरण करना है।

  • आंध्र विश्वविद्यालय ने जेनरेटिव एआई (Generative AI) पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) शुरू किया।
  • कार्यक्रम का मुख्य केंद्र नैतिकता, नैतिक मूल्य और NEP 2020 का तकनीकी एकीकरण है।
  • 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा में प्रणालीगत बदलाव पर जोर दिया गया।

विशाखापत्तनम स्थित आंध्र विश्वविद्यालय (AU) के शिक्षा विभाग ने सोमवार को 'शिक्षा और प्रशिक्षण में जेनरेटिव एआई: शिक्षण-अधिगम को बदलने के लिए नैतिक मूल्यों, नैतिकता और NEP 2020 का एकीकरण' विषय पर एक महत्वपूर्ण पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) के सदस्य और NEP समन्वयक के. पुष्पनादम ने किया।

समारोह को संबोधित करते हुए श्री पुष्पनादम ने जोर देकर कहा कि देश का भविष्य कक्षाओं में आकार लेता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, जो लगभग साढ़े तीन दशकों के बाद पेश की गई है, तभी सफल होगी जब इसे जमीनी स्तर पर कक्षाओं में प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम में बदलाव और स्कूल प्रशासन में नेतृत्व ही वास्तविक विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शिक्षा में AI का प्रवेश केवल एक तकनीकी अपग्रेड नहीं है, बल्कि एक वैचारिक बदलाव है। जब संस्थान नैतिकता (Ethics) और नैतिक मूल्यों को AI के साथ जोड़ते हैं, तो वे यह सुनिश्चित करते हैं कि तकनीक मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक मूल्यों को प्रतिस्थापित न करे, बल्कि उन्हें सशक्त बनाए। यह कदम भारत को वैश्विक AI नेतृत्व की ओर ले जाने के लिए आवश्यक है।

आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति जी.पी. राजा शेखर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जटिल समस्याओं को हल करने में अत्यधिक प्रभावी हो सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक तकनीकों को केवल एक विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि मुख्य पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने इस कार्यक्रम की विशिष्टता बताते हुए कहा कि यह किसी एक विशेष क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाता है।

"शिक्षक शिक्षा में सुधार और तकनीक का सही उपयोग ही 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की कुंजी है।"

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के प्रमुख एम.टी.वी. नगरaju ने उल्लेख किया कि आंध्र विश्वविद्यालय जेनरेटिव एआई पर इस तरह का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने वाला पहला विश्वविद्यालय बन गया है। वहीं, कार्यक्रम की संयोजक टी. शेरोन राजू ने कहा कि ज्ञान-आधारित समाज के निर्माण के लिए शिक्षकों और छात्रों को AI का बुद्धिमानी और जिम्मेदारी से उपयोग करना सिखाना अनिवार्य है।

पूर्व IIIT अगरतला निदेशक पी.एस. अवधानी ने भारत के AI क्षेत्र में अग्रणी बनने की संभावना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संकायों की सक्रिय भागीदारी आने वाली पीढ़ियों के लिए मूल्यवर्धन करेगी। यह कार्यक्रम न केवल कौशल विकास पर केंद्रित है, बल्कि रचनात्मकता और तकनीक के सार्थक एकीकरण पर भी आधारित है।

क्या आप जानते हैं?: जेनरेटिव एआई (Generative AI) वह तकनीक है जो न केवल डेटा का विश्लेषण करती है, बल्कि नया कंटेंट, इमेज और टेक्स्ट भी बना सकती है, जो इसे पारंपरिक AI से अलग बनाता है।

Frequently Asked Questions

1. इस FDP कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को जेनरेटिव एआई के उपयोग में सक्षम बनाना और इसे NEP 2020 के दिशा-निर्देशों तथा नैतिक मूल्यों के साथ जोड़ना है।

p>2. 'विकसित भारत 2047' का शिक्षा से क्या संबंध है?
सरकार का मानना है कि शिक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के माध्यम से ही भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बन सकता है।