डॉ. NTR यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (Dr. NTRUHS) ने आंध्र प्रदेश के MBBS उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे काउंसलिंग के दौरान अधिक से अधिक कॉलेजों का चयन करें ताकि सीट मिलने की संभावना बढ़ सके।
- सीट आवंटन की संभावना बढ़ाने के लिए उम्मीदवारों को सभी उपलब्ध कॉलेजों को चुनने की सलाह दी गई है।
- वीसी पी. चंद्रशेखर ने रैंक-आधारित आवंटन में विसंगतियों के दावों को खारिज किया।
- प्रथम चरण में 4,581 कुल सीटों में से 4,231 उम्मीदवारों ने रिपोर्ट किया।
- MBBS कक्षाएं 15 सितंबर से शुरू होने वाली हैं।
डॉ. NTR यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (Dr. NTRUHS) ने आंध्र प्रदेश में MBBS काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने वाले छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है। कुलपति पी. चंद्रशेखर और रजिस्ट्रार टी. साई सुधीर ने दृढ़ता से सुझाव दिया है कि उम्मीदवार अपनी पसंद के क्रम में अधिकतम संख्या में कॉलेजों या सभी उपलब्ध कॉलेजों का विकल्प चुनें, ताकि सीट मिलने की संभावना को काफी बढ़ाया जा सके।
यह सलाह छात्रों द्वारा आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर उठाए गए सवालों के जवाब में दी गई है। विजयवाड़ा में मीडिया को संबोधित करते हुए, कुलपति ने स्पष्ट किया कि काउंसलिंग के पहले चरण में कुछ उम्मीदवारों को उनकी रैंक के अनुसार कॉलेज आवंटित नहीं किए गए, यह रिपोर्ट पूरी तरह से गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीट आवंटन पूरी तरह से उम्मीदवार की रैंक, सीटों की उपलब्धता और उम्मीदवार द्वारा पंजीकृत कॉलेज विकल्पों पर आधारित होता है।
विश्वविद्यालय ने पहले चरण के दौरान एक विशेष प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला: आरक्षित श्रेणियों के कई उम्मीदवारों ने केवल सीमित संख्या में विकल्प जमा किए थे। परिणामस्वरूप, उन्हें केवल उन्हीं कॉलेजों में आरक्षण-श्रेणी की सीटें मिलीं जिन्हें उन्होंने विशेष रूप से चुना था। इसके विपरीत, जिन उम्मीदवारों ने अधिक कॉलेजों का चयन किया, उन्हें ओपन कैटेगरी के तहत भी सीटें मिल गईं, जो एक व्यापक प्राथमिकता सूची के रणनीतिक लाभ को दर्शाता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मेडिकल प्रवेश में बाधा अक्सर योग्यता की कमी नहीं, बल्कि विकल्प भरने की रणनीति की कमी होती है। जब छात्र अपने विकल्पों को सीमित करते हैं, तो वे अनजाने में 'कृत्रिम रिक्तियां' पैदा करते हैं, जहाँ पात्र उम्मीदवार होने के बावजूद सीटें खाली रह जाती हैं। यह अक्षमता शैक्षणिक कैलेंडर में देरी करती है और आगामी काउंसलिंग राउंड पर दबाव डालती है।
प्रवेश रैंक जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण विकल्पों का रणनीतिक चयन भी है ताकि चिकित्सा शिक्षा में सहज प्रवेश सुनिश्चित हो सके।
प्रवेश की वर्तमान स्थिति के बारे में बताते हुए, विश्वविद्यालय ने पुष्टि की कि कन्वेनर कोटा के लिए प्रथम चरण की काउंसलिंग पूरी हो चुकी है। कुल 4,581 सीटों में से 4,321 आवंटित की गईं, जिनमें से 4,231 उम्मीदवारों ने निर्धारित समय सीमा तक अपने आवंटित कॉलेजों में रिपोर्ट किया। लगभग 90 उम्मीदवार रिपोर्ट नहीं कर सके, जिससे वे सीटें अगले दौर के लिए उपलब्ध हो गईं।
वर्तमान में, ऑल इंडिया कोटा (AIQ) का दूसरा चरण चल रहा है, जिसके 11 सितंबर तक समाप्त होने की उम्मीद है। राज्य कोटा काउंसलिंग AIQ प्रक्रिया के तुरंत बाद शुरू होने की संभावना है। विश्वविद्यालय ने आश्वासन दिया है कि उम्मीदवारों को दूसरे और आगामी चरणों के दौरान अपनी पसंद के नए विकल्प चुनने का अवसर मिलेगा।
| चरण/कोटा | कुल सीटें | आवंटित सीटें | रिपोर्ट करने वाले छात्र |
|---|---|---|---|
| प्रथम चरण (कन्वेनर कोटा) | 4,581 | 4,321 | 4,231 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या अधिक कॉलेजों को चुनने से शीर्ष संस्थानों के लिए मेरी प्राथमिकता कम हो जाएगी?
नहीं, सिस्टम विकल्पों को प्राथमिकता के क्रम में प्रोसेस करता है। आपको पहले आपकी पहली पसंद के लिए विचार किया जाएगा; अतिरिक्त विकल्प केवल एक सुरक्षा जाल (safety net) के रूप में कार्य करते हैं।
प्रश्न 2: MBBS कक्षाएं आधिकारिक तौर पर कब शुरू होंगी?
वर्तमान सत्र के लिए MBBS कक्षाएं 15 सितंबर से शुरू होने वाली हैं।