केरल की महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी चार वर्षीय डिग्री स्नातकों के लिए एक वर्षीय पीजी प्रोग्राम शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही पाठ्यक्रम में बदलाव और छात्रों के लिए नई वित्तीय सहायता योजना भी लागू की जाएगी।
- एमजी यूनिवर्सिटी 2028 तक 4-वर्षीय यूजी स्नातकों के लिए एक वर्षीय पीजी प्रोग्राम शुरू करेगी।
- मौजूदा 2-वर्षीय पीजी पाठ्यक्रमों को संशोधित किया जाएगा और धीरे-धीरे समाप्त कर दिया जाएगा।
- छात्रों के लिए 'होप फंड' (Hope Fund) शुरू किया गया है, जो ₹1 लाख तक की आपातकालीन सहायता देगा।
- यूजीसी नियमों के उल्लंघन में स्वीकृत शोध केंद्रों का पुन: निरीक्षण किया जाएगा।
केरल के कोट्टायम स्थित महात्मा गांधी विश्वविद्यालय ने एक वर्षीय स्नातकोत्तर (PG) कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। यह नई व्यवस्था 2028 तक पूरी तरह लागू हो जाएगी, जब विश्वविद्यालय के चार वर्षीय स्नातक (UG) ऑनर्स प्रोग्राम का पहला बैच स्नातक होगा।
मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय सिंडिकेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया। यह कदम राज्य उच्च शिक्षा परिषद के उस निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें चार वर्षीय डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम पेश करने को कहा गया था।
पाठ्यक्रम में बदलाव और उद्योग जगत से जुड़ाव
विश्वविद्यालय केवल कोर्स की अवधि कम नहीं कर रहा है, बल्कि पूरे पाठ्यक्रम का नवीनीकरण कर रहा है। सिंडिकेट ने मौजूदा दो-वर्षीय पीजी कार्यक्रमों के सिलेबस को संशोधित करने का निर्णय लिया है ताकि वे उन छात्रों के लिए उपलब्ध रहें जो अभी भी तीन-वर्षीय यूजी डिग्री चुनते हैं। हालांकि, भविष्य में इन दो-वर्षीय कार्यक्रमों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा।
इसके अलावा, विश्वविद्यालय अपने चार वर्षीय ऑनर्स डिग्री प्रोग्राम को अधिक "इंडस्ट्री-फ्रेंडली" बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसमें कौशल विकास और नौकरी उन्मुख मॉड्यूल को जोड़ा जाएगा ताकि छात्रों को डिग्री के बाद रोजगार मिलने में आसानी हो।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के लचीलेपन और बहुविषयक सीखने के लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पीजी की अवधि कम करके, एमजी यूनिवर्सिटी कुशल पेशेवरों को तेजी से बाजार में लाने की कोशिश कर रही है, जिससे केरल के युवाओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
"एक वर्षीय पीजी कार्यक्रमों की ओर बदलाव शैक्षणिक सुव्यवस्थितकरण के वैश्विक रुझान को दर्शाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उच्च शिक्षा केवल विशेषज्ञता पर केंद्रित हो, न कि स्नातक स्तर की बातों के दोहराव पर।"
प्रशासनिक सुधार और छात्र कल्याण
शिक्षा के साथ-साथ विश्वविद्यालय गुणवत्ता नियंत्रण पर भी जोर दे रहा है। सिंडिकेट ने उन शोध केंद्रों के पुन: निरीक्षण का निर्णय लिया है, जिन्हें कथित तौर पर पिछले एलडीएफ (LDF) सरकार द्वारा नियुक्त सिंडिकेट के कार्यकाल के दौरान यूजीसी (UGC) नियमों का उल्लंघन करके मंजूरी दी गई थी।
छात्र कल्याण के लिए विश्वविद्यालय ने 'होप फंड' (Hope Fund) नामक एक नई सहायता योजना को मंजूरी दी है। यह फंड आपदाओं या दुर्घटनाओं का सामना करने वाले छात्रों को ₹1 लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। यह मौजूदा ₹10,000 की सहायता राशि से बहुत बड़ा सुधार है। विशेष रूप से, अब पीएचडी स्कॉलर्स को भी इसमें शामिल किया गया है। आनंद जोशी नामक पीएचडी छात्र इस योजना के पहले लाभार्थी बने हैं।
| विशेषता | पुरानी सहायता योजना | नया होप फंड |
|---|---|---|
| अधिकतम राशि | ₹10,000 | ₹1,00,000 |
| पीएचडी पात्रता | शामिल नहीं | शामिल |
| आय सीमा | परिवर्तनीय | वार्षिक पारिवारिक आय अधिकतम ₹1 लाख |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या दो-वर्षीय पीजी कोर्स तुरंत बंद हो जाएंगे?
नहीं, वे उन छात्रों के लिए जारी रहेंगे जो तीन-वर्षीय यूजी प्रोग्राम चुनते हैं, लेकिन भविष्य में इन्हें धीरे-धीरे खत्म कर दिया जाएगा।
प्रश्न 2: होप फंड के लिए कौन पात्र है?
विश्वविद्यालय विभागों के वे छात्र जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय ₹1 लाख से अधिक नहीं है और जिन्होंने किसी दुर्घटना या आपदा का सामना किया है।