सेंटूरियन यूनिवर्सिटी के कुलपति पी.के. मोहंती ने विज़ियानागरम में एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए बताया कि डाक टिकट और सिक्कों जैसे शौक बच्चों की बौद्धिक क्षमता और नवाचार को बढ़ाते हैं।

  • शौक बच्चों को लीक से हटकर सोचने और नवाचार करने के लिए प्रेरित करते हैं।
  • विज़ियानागरम में रोटरी क्लब द्वारा डाक टिकट, मुद्रा और सिक्कों की प्रदर्शनी आयोजित की गई।
  • ऐसी गतिविधियाँ खाली समय के सदुपयोग और विभिन्न डोमेन में ज्ञान बढ़ाने में सहायक होती हैं।

विज़ियानागरम में बुधवार को आयोजित एक विशेष प्रदर्शनी के दौरान सेंटूरियन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के कुलपति पी.के. मोहंती ने शिक्षा और व्यक्तिगत विकास में शौक (Hobbies) की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पेंटिंग, नृत्य, संगीत और डाक टिकट संग्रह जैसे शौक केवल समय बिताने के साधन नहीं हैं, बल्कि ये बच्चों को रचनात्मक रूप से सोचने और दुनिया को एक नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करते हैं।

यह आयोजन रोटरी क्लब द्वारा उनकी 'नव करण यूथ' गतिविधियों के हिस्से के रूप में किया गया था। कुलपति मोहंती ने इस प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल बच्चों को, बल्कि सभी आयु वर्ग के लोगों को नए शौक अपनाने और अपने खाली समय का उद्देश्यपूर्ण उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में जहाँ केवल शैक्षणिक अंकों पर जोर दिया जाता है, वहां इस तरह के गैर-शैक्षणिक शौक संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब बच्चे दुर्लभ सिक्कों या टिकटों का संग्रह करते हैं, तो वे अनजाने में इतिहास, भूगोल और अर्थव्यवस्था के बारे में सीखते हैं, जो कि किताबी ज्ञान से कहीं अधिक प्रभावी होता है।

"रचनात्मकता केवल कक्षा के भीतर नहीं, बल्कि उन गतिविधियों में पनपती है जहाँ जिज्ञासा और जुनून का मिलन होता है।"

कार्यक्रम के दौरान, छात्रों ने कुलपति को बताया कि कैसे उन्होंने अन्य राज्यों और जिलों में रहने वाले समान विचारधारा वाले लोगों के सहयोग से दुर्लभ मुद्रा नोटों, डाक टिकटों और सिक्कों का संग्रह किया है। यह दर्शाता है कि शौक बच्चों में नेटवर्किंग और संचार कौशल का भी विकास करते हैं।

कुलपति ने रोटरी क्लब के अध्यक्ष निर्मल कुमार जैन और आयोजकों पी. कृष्णा, कापुगंती रवि और ललित बछवत की सराहना की, जिन्होंने महीने भर चलने वाली युवा गतिविधियों में इस प्रदर्शनी को शामिल किया।

क्या आप जानते हैं?: डाक टिकट संग्रह (Philately) को दुनिया के सबसे पुराने और सबसे ज्ञानवर्धक शौकों में से एक माना जाता है, जो वैश्विक इतिहास का एक दृश्य रिकॉर्ड प्रदान करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: बच्चों के लिए शौक क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर: शौक बच्चों की रचनात्मक सोच को बढ़ाते हैं, उन्हें तनावमुक्त रखते हैं और उन्हें विभिन्न विषयों में व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं।

प्रश्न 2: विज़ियानागरम में आयोजित प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: इसका उद्देश्य युवाओं को नई रुचियां विकसित करने के लिए प्रेरित करना और उन्हें इतिहास व संस्कृति से जोड़ने के लिए डाक टिकटों और सिक्कों के संग्रह को बढ़ावा देना था।