नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने भारत में चिकित्सा शिक्षा के दायरे को बढ़ाते हुए 13,000 से अधिक MBBS सीटें जोड़ी हैं। कर्नाटक इस विस्तार में सबसे आगे रहा, जिससे देश में कुल सीटों की संख्या 1,40,214 हो गई है।
- NMC ने 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13,186 नई MBBS सीटें जोड़ीं।
- राष्ट्रीय स्तर पर कुल MBBS सीटों की संख्या 1,27,028 से बढ़कर 1,40,214 हो गई है।
- कर्नाटक 1,650 नई सीटों के साथ शीर्ष पर रहा, उसके बाद तमिलनाडु और बिहार का स्थान है।
- दिल्ली सहित सात राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं हुई।
भारत में स्वास्थ्य कार्यबल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने 13,186 MBBS सीटों की भारी वृद्धि को मंजूरी दी है। यह विस्तार ऐसे समय में आया है जब मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) NEET UG 2026 के लिए दूसरे दौर के प्रोविजनल अलॉटमेंट परिणामों का प्रबंधन कर रही है, जिससे हजारों मेडिकल उम्मीदवारों को राहत मिलेगी।
इन नई सीटों का वितरण क्षेत्रीय स्तर पर काफी असमान है। कर्नाटक इस विस्तार चरण में अग्रणी बनकर उभरा है, जिसने 1,650 सीटें जोड़ीं, जिससे वहां 76 मेडिकल कॉलेजों में कुल सीटों की संख्या 15,745 हो गई है। अन्य प्रमुख राज्यों में तमिलनाडु (1,250 सीटें), बिहार (1,240 सीटें) और उत्तर प्रदेश (1,200 सीटें) शामिल हैं। अकेले इन चार राज्यों ने कुल नई सीटों के 40% से अधिक हिस्से पर कब्जा किया है।
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | बढ़ी हुई सीटें | कुल सीटें |
|---|---|---|
| कर्नाटक | 1,650 | 15,745 |
| तमिलनाडु | 1,250 | 14,299 |
| बिहार | 1,240 | 4,660 |
| उत्तर प्रदेश | 1,200 | 14,400 |
| राजस्थान | 1,100 | 8,280 |
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि हालांकि कुल वृद्धि सकारात्मक है, लेकिन असमान वितरण चिकित्सा बुनियादी ढांचे में एक प्रणालीगत अंतर को उजागर करता है। यह तथ्य कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और नागालैंड एवं मिजोरम जैसे कई उत्तर-पूर्वी राज्यों में शून्य वृद्धि दर्ज की गई, यह दर्शाता है कि विस्तार उन राज्यों की ओर अधिक झुका हुआ है जहां पहले से ही मजबूत मेडिकल हब मौजूद हैं।
"सीटों की संख्या बढ़ाना केवल पहला कदम है; असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि फैकल्टी की गुणवत्ता और क्लिनिकल एक्सपोजर, MBBS प्रवेशों की मात्रात्मक वृद्धि के साथ तालमेल बिठा सकें।"
NMC ने इस मैट्रिक्स के कार्यान्वयन पर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि काउंसलिंग अधिकारी किसी भी विसंगति के मामले में मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) से संपर्क करें। सख्त चेतावनी दी गई है कि स्वीकृत और अधिसूचित संख्या से अधिक सीटों पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी ताकि मेडिकल कॉलेजों की अनियंत्रित वृद्धि को रोका जा सके।
ऐतिहासिक रूप से, भारत WHO मानकों की तुलना में डॉक्टर-मरीज अनुपात की कमी से जूझता रहा है। 1.4 लाख सीटों तक पहुँचने का यह आक्रामक प्रयास विदेशी मेडिकल डिग्री पर निर्भरता कम करने और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में घरेलू स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार करने के व्यापक रणनीतिक लक्ष्य का हिस्सा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: किस राज्य में MBBS सीटों में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई?
कर्नाटक ने 1,650 अतिरिक्त सीटों के साथ सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की।
प्रश्न 2: किन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में कोई अतिरिक्त सीटें नहीं मिलीं?
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, दादरा और नगर हवेली, दिल्ली, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड में कोई वृद्धि नहीं हुई।