ब्रिक्स देशों के नेताओं ने शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मानवीय उपयोग और एक नई वैश्विक विश्वविद्यालय रैंकिंग प्रणाली विकसित करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को शामिल करने की पहल की भी सराहना की गई है।

  • ब्रिक्स नेताओं ने शिक्षा में AI के सुरक्षित और नैतिक उपयोग पर जोर दिया।
  • एक नई 'ब्रिक्स विश्वविद्यालय वैश्विक रैंकिंग और मूल्यांकन प्रणाली' विकसित करने पर चर्चा हुई।
  • भारत की पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को शामिल करने की पहल को समर्थन मिला।
  • कौशल विकास और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए सहयोग पर सहमति बनी।

नई दिल्ली: ब्रिक्स (BRICS) देशों के नेताओं ने शनिवार को शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। नेताओं ने उभरती प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मानव-केंद्रित उपयोग और शिक्षा के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने का समर्थन किया है। इस बैठक का एक मुख्य आकर्षण 'ब्रिक्स विश्वविद्यालय वैश्विक रैंकिंग और मूल्यांकन प्रणाली' (BRICS University Global Ranking and Evaluation System) के विकास के लिए आगे की खोज और सहयोग पर चर्चा करना रहा।

इस शिखर सम्मेलन के दौरान, नेताओं ने मौजूदा ब्रिक्स शिक्षा तंत्रों, विशेष रूप से ब्रिक्स नेटवर्क यूनिवर्सिटी के माध्यम से सहयोग जारी रखने पर जोर दिया। एक आधिकारिक घोषणा में, नेताओं ने भारत की उस महत्वपूर्ण पहल की सराहना की, जिसके तहत पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के लिए 'ब्रिक्स मार्गदर्शक सिद्धांतों' को प्रसारित किया गया है। नेताओं ने ब्रिक्स नेटवर्क यूनिवर्सिटी को इन पारंपरिक और स्थानीय ज्ञान प्रणालियों को एक अतिरिक्त 'अंतर्राष्ट्रीय विषय समूह' (ITG) के रूप में शामिल करने पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ब्रिक्स देशों का यह कदम पश्चिमी-केंद्रित शैक्षणिक मानकों को चुनौती देने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। शिक्षा में AI का समावेश और एक स्वतंत्र रैंकिंग प्रणाली विकसित करना, वैश्विक शिक्षा के भू-राजनीतिक संतुलन को बदल सकता है। यह न केवल विकासशील देशों के छात्रों के लिए नए अवसर खोलेगा, बल्कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने का एक अनूठा मंच भी प्रदान करेगा।

शिक्षा में तकनीकी नवाचार और पारंपरिक ज्ञान का संगम ही भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव रखेगा।

नेताओं ने प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा (ECCE), बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN), और डिजिटल साक्षरता में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की। इसके अलावा, शैक्षणिक और व्यावसायिक गतिशीलता सुनिश्चित करने के लिए योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता और मजबूत संस्थागत भागीदारी पर जोर दिया गया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: ब्रिक्स समूह, जो ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका को मिलाकर बना था, अब तेजी से विस्तार कर रहा है। शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से सदस्य देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना इस समूह का एक दीर्घकालिक लक्ष्य रहा है, ताकि वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को सशक्त बनाया जा सके।

Did You Know?: ब्रिक्स नेटवर्क यूनिवर्सिटी का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच अनुसंधान और शैक्षणिक आदान-प्रदान को सुव्यवस्थित करना है।

Frequently Asked Questions

1. ब्रिक्स देशों द्वारा AI पर क्या निर्णय लिया गया है?
नेताओं ने शिक्षा में AI के सुरक्षित, नैतिक और मानव-केंद्रित उपयोग को बढ़ावा देने और इसके सर्वोत्तम उपयोगों को साझा करने का समर्थन किया है।

2. भारत की इस बैठक में क्या भूमिका रही?
भारत ने पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को शैक्षणिक ढांचे में शामिल करने की पहल की, जिसे ब्रिक्स नेताओं ने व्यापक रूप से सराहा।