एक मानवाधिकार समूह ने बताया कि टिंसुकिया जिले के एक परित्यक्त कोयला खनन में दो पिता‑पुत्र को टॉक्सिक गैस ने मार डाला। पुलिस अभी तक कारण की पुष्टि नहीं कर पा रही है, जबकि अधिकार समूह ने त्वरित जांच की मांग की है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सागर अली और इशान अली ने टॉक्सिक गैस के कारण मौत का सामना किया।
  • घटना असम के टिंसुकिया जिले में अवैध कोयला खनन के दौरान हुई।
  • अधिकार समूह ने कड़ी जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की।

टिंसुकिया जिले की अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद (IHRC) ने कहा कि पिता‑पुत्र सागर अली और इशान अली ने लीडो क्षेत्र में ‘डिप माइन’ नामक परित्यक्त कोयला क्षेत्र में अवैध खनन के दौरान टॉक्सिक गैस साँस लेकर दम तोड़ दिया। घटना 20 जुलाई की रात को हुई, जबकि स्थानीय पुलिस अभी तक मृत्यु के कारण की पुष्टि नहीं कर पाई है।

इतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)

नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड्स, कोल इंडिया लिमिटेड की एक विशेष इकाई, ने कई दशकों से असम, मेघालय और अरुणाचल में कोयला उत्खनन किया है। लेकिन ‘रैट‑होल’ खनन, जहाँ संकीर्ण, गहरी शाफ्ट और क्षैतिज सुरंगें केवल एक व्यक्ति के लिए ही पर्याप्त होती हैं, अभी भी ग़ैर‑क़ानूनी रूप से जारी है। 2022‑2024 के बीच कम से कम दस खनिक ऐसे खतरनाक गड्ढों में फँसे या विषाक्त गैसों के कारण मारे गये हैं। इस प्रकार की अनियंत्रित खनन न केवल श्रमिकों की जान जोखिम में डालती है, बल्कि पर्यावरणीय क्षति भी बढ़ाती है।

Why This Matters (इसके मायने क्या हैं)

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, अवैध ‘रैट‑होल’ खनन न केवल श्रमिक सुरक्षा को नष्ट करता है, बल्कि स्थानीय जल स्रोतों और वायुमंडल को भी विषाक्त पदार्थों से दूषित करता है, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार की घटनाएँ असम के सामाजिक‑आर्थिक विकास को बाधित करती हैं, क्योंकि समुदायों को रोजगार के विकल्पों के बजाय सुरक्षा की चिंता करनी पड़ती है।

राज्य और केंद्र सरकारों को अब तत्कालिक नियामक उपायों के साथ साथ पुनर्वास‑पुनर्स्थापना योजनाएँ तैयार करनी होंगी, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा मिल सके।

"अवैध कोयला खनन से उत्पन्न विषाक्त गैसें अक्सर मेथेन या कार्बन मोनोऑक्साइड होती हैं, जो श्वसन प्रणाली को तुरंत नुकसान पहुँचाती हैं," कहते हैं खनन सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. रितु शर्मा।
क्या आप जानते हैं? (Did You Know?): भारत में सबसे बड़ी कोयला खदान, जामनगर कोल फील्ड, भी ‘रैट‑होल’ खनन के कारण कई बार बंद कर दी गई थी, जिससे सुरक्षा मानकों पर बार‑बार सवाल उठे।

Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1: क्या टॉक्सिक गैस का रिसाव केवल अवैध खनन में ही होता है?
उत्तर: नहीं, लेकिन अनियंत्रित खनन में सुरक्षा मानकों की कमी के कारण गैस रिसाव की संभावना बहुत अधिक होती है।

प्रश्न 2: इस मामले में कौन जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?
उत्तर: अधिकार समूह ने ‘बिग बी’ कोडनाम वाले मुख्य ऑपरेटर की पहचान की है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी की पुष्टि अभी भी जांच के अधीन है।