केरल के शेंदुर्नी वन्यजीव अभयारण्य में किए गए एक संयुक्त सर्वेक्षण में 67 उभयचर और 76 सरीसृप प्रजातियों की पहचान की गई है। इस खोज में कई दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियां शामिल हैं जो केवल पश्चिमी घाट में पाई जाती हैं।

मुख्य बातें

  • शेंदुर्नी वन्यजीव अभयारण्य में 67 उभयचर और 76 सरीसृप प्रजातियां दर्ज की गईं।
  • 18 उभयचर और 28 सरीसृप प्रजातियां ऐसी मिलीं जो पहले कभी रिकॉर्ड नहीं की गई थीं।
  • सर्वेक्षण में कई लुप्तप्राय प्रजातियां जैसे कोचीन केन टर्टल और इंडियन कंगारू लिजार्ड शामिल हैं।
  • यह पहली बार था जब उभयचरों और सरीसृपों का एक साथ संयुक्त सर्वेक्षण किया गया।

केरल के अगस्त्यमाला बायोस्फीयर के अंतर्गत आने वाले शेंदुर्नी वन्यजीव अभयारण्य में हाल ही में संपन्न हुआ एक ऐतिहासिक सर्वेक्षण जैव विविधता के मामले में बड़े खुलासे लेकर आया है। वन विभाग, शेंदुर्नी वन्यजीव अभयारण्य और अरण्यकम नेचर फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस चार दिवसीय संयुक्त सर्वेक्षण में वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने 67 उभयचर (Amphibians) और 76 सरीसृप (Reptiles) प्रजातियों की पहचान की है।

यह सर्वेक्षण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार था जब उभयचरों और सरीसृपों का एक साथ अध्ययन किया गया। 17 जुलाई से 20 जुलाई तक चले इस अभियान में कालीकट विश्वविद्यालय और केरल वन अनुसंधान संस्थान जैसे 10 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों के शोधकर्ताओं और छात्रों ने भाग लिया। शोधकर्ताओं ने बताया कि इस सर्वेक्षण के दौरान 18 उभयचर और 28 सरीसृप प्रजातियां ऐसी मिलीं, जिनका उल्लेख पहले के बायोस्फीयर प्रबंधन योजना या पिछले सर्वेक्षणों में नहीं किया गया था।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह खोज न केवल पारिस्थितिक तंत्र की स्वास्थ्य स्थिति को दर्शाती है, बल्कि संरक्षण प्रयासों के लिए नए दिशा-निर्देश भी प्रदान करती है। शेंदुर्नी अभयारण्य में पाई जाने वाली प्रजातियां जैसे मनोहारी बुश फ्रॉग और केल्ड वाइन स्नेक केवल अगस्त्यमाला बायोस्फीयर में ही पाई जाती हैं, जो इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बनाती हैं।

शेंदुर्नी अन्य अभयारण्यों की तुलना में उभयचर विविधता और स्वदेशी प्रजातियों के मामले में काफी आगे है।

सर्वेक्षण में आईयूसीएन (IUCN) रेड लिस्ट में शामिल कई संकटग्रस्त प्रजातियों का भी पता चला है। इनमें कोचीन केन टर्टल और इंडियन कंगारू लिजार्ड जैसे लुप्तप्राय जीव शामिल हैं। इसके अलावा, 32 उभयचर प्रजातियां ऐसी मिली हैं जिन्हें खतरे की श्रेणी में रखा गया है।

प्रजातियों का विवरण

श्रेणीकुल प्रजातियांमहत्वपूर्ण तथ्य
उभयचर (Amphibians)6755 प्रजातियां पश्चिमी घाट की स्थानिक हैं
सरीसृप (Reptiles)7638 प्रजातियां पश्चिमी घाट की स्थानिक हैं

इस अभियान का नेतृत्व शेंदुर्नी वन्यजीव वार्डन एस. हीरालाल और शोधकर्ता संदीप दास ने किया। यह डेटा भविष्य में वन्यजीव संरक्षण नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

क्या आप जानते हैं?: शेंदुर्नी वन्यजीव अभयारण्य 173 वर्ग किमी में फैला हुआ है और यह पश्चिमी घाट की जैव विविधता का एक प्रमुख केंद्र है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. इस सर्वेक्षण की मुख्य विशेषता क्या थी?
इसकी मुख्य विशेषता यह थी कि यह पहली बार था जब उभयचरों और सरीसृपों का एक साथ संयुक्त सर्वेक्षण किया गया था।

2. क्या इसमें कोई नई प्रजातियां मिलीं?
हाँ, 18 नई उभयचर और 28 नई सरीसृप प्रजातियां मिलीं जो पहले के रिकॉर्ड में नहीं थीं।