पर्यावरण एनजीओ 'ग्रीन विशाखा' ने विशाखापट्टनम में एआई डेटा केंद्रों के सामाजिक, कानूनी और पर्यावरणीय प्रभावों पर एक महत्वपूर्ण विचार-मंथन सत्र आयोजित किया। विशेषज्ञों ने भूमि, जल और जैव विविधता पर पड़ने वाले संभावित खतरों के प्रति आगाह किया है।
मुख्य बातें
- एआई डेटा केंद्रों के कारण भूमि, जल और बिजली की भारी खपत की आशंका।
- 'ग्रीन विशाखा' ने सामाजिक और पर्यावरणीय न्याय की मांग की।
- कानूनी विशेषज्ञों ने विधानसभा में बहस की कमी पर चिंता जताई।
विशाखापट्टनम के Alluri Seetharama Raju Vignana Kendram में रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। पर्यावरण एनजीओ Green Visakha ने कानूनी विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के साथ मिलकर प्रस्तावित 'हाइपरस्केल एआई डेटा केंद्रों' के दूरगामी प्रभावों पर चर्चा की।
ग्रीन विशाखा के अध्यक्ष Raja Rama Mohan Roy ने जोर देकर कहा कि इन विशाल परियोजनाओं को केवल तकनीकी प्रगति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि परियोजनाओं का मूल्यांकन प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण और सामाजिक न्याय के आधार पर किया जाना चाहिए, क्योंकि इनका सीधा असर स्थानीय भूमि, जल संसाधनों, बिजली की उपलब्धता और जैव विविधता पर पड़ेगा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे डेटा केंद्रों की ऊर्जा और पानी की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। यदि इन केंद्रों के लिए बुनियादी ढांचे का विकास बिना किसी सख्त पर्यावरणीय जांच के किया जाता है, तो यह स्थानीय समुदायों के लिए जल संकट और पारिस्थितिक असंतुलन पैदा कर सकता है।
इन परियोजनाओं को लागू करने से पहले पारदर्शी सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (SIA/EIA) अनिवार्य होना चाहिए।
आंध्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर Byragi Reddy ने जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, ह्यूमन राइट्स फोरम के प्रतिनिधि V.S. Krishna ने संवैधानिक और पर्यावरण कानूनों के कड़ाई से पालन की वकालत की। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस बात पर भी गहरी चिंता व्यक्त की कि इन परियोजनाओं से संबंधित सरकारी आदेशों पर राज्य विधानसभा में कोई विधायी चर्चा नहीं हुई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में डिजिटल क्रांति के साथ डेटा केंद्रों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। हालांकि, भारत के कई राज्यों में डेटा केंद्रों के लिए भूमि अधिग्रहण और ऊर्जा खपत को लेकर कानूनी विवाद और पर्यावरणीय चिंताएं पहले भी उठ चुकी हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: एआई डेटा केंद्र पर्यावरण को कैसे प्रभावित करते हैं?
उत्तर: ये केंद्र भारी मात्रा में बिजली की खपत करते हैं और उन्हें ठंडा रखने के लिए अत्यधिक जल संसाधनों की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 2: ग्रीन विशाखा की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: उनकी मुख्य मांग परियोजनाओं का पारदर्शी पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन करना है।