विसाखपट्टनम स्थित इंस्टीट्यूट फॉर सॉलिड वेस्ट रिसर्च एंड इकोलॉजिकल बैलेंस (INSWAREB) के संस्थापक निदेशक एन. भानुमतिदास और एन. कालिदास ने फॉसिल ईंधन को नाभिकीय‑प्लाज़्मा तकनीक से बदलकर इको‑फ्रेंडली सिमेंट बनाने का वैश्विक योजना प्रस्तुत की है। यह प्रस्ताव औद्योगिक कचरे को पुनः उपयोग करके कार्बन उत्सर्जन को नाटकीय रूप से घटाने का लक्ष्य रखता है।
- प्लाज़्मा टॉर्च और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) की मदद से कोल को पूरी तरह हटाया जा सकता है।
- इंडस्ट्रील वेस्ट को एंजीनियर्ड ग्रेन्यूलेटेड सिमेंट (EGCS) में बदलकर कचरा निपटान समस्या हल होगी।
- नाभिकीय ऊर्जा के साथ 1.2 MW पावर के लिये केवल 36 ग्राम रेडियोएक्टिव सामग्री की आवश्यकता होगी।
परिचय
सिमेंट उत्पादन विश्व स्तर पर लगभग 8 % ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का कारण है। इस समस्या का समाधान खोजने के लिये INSWAREB के संस्थापक निदेशकों ने पारंपरिक कोयला‑आधारित रोटरी किल्न की जगह नाभिकीय‑प्लाज़्मा प्रक्रिया का प्रस्ताव रखा है।
प्रस्ताव की तकनीक
प्रस्तावित प्रणाली में 3,000 °C‑10,000 °C तक तापमान वाले थर्मल प्लाज़्मा टॉर्च का उपयोग किया जाएगा, जिससे क्लिंकर निर्माण के लिये आवश्यक उच्च ताप प्राप्त हो सकेगा, बिना किसी जीवाश्म ईंधन के दहन के। इस प्रक्रिया को शक्ति प्रदान करने के लिये छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) को जोड़ा गया है, जो दीर्घकालिक, साफ‑सुथरी और स्थिर ऊर्जा प्रदान करते हैं।
औद्योगिक कचरा उपयोग
भारत में 2.86 अरब टन पोण्ड ऐश 26,000 हैक्टर से अधिक भूमि को कब्जा कर रहा है। प्लाज़्मा‑आधारित एंजीनियर्ड ग्रैन्युलेटेड सिमेंटियस स्लैग (EGCS) इन कचरों को एक समान खनिज कांच में बदल देता है, जिसे सूखे अल्कली सक्रियकों के साथ मिलाकर अत्यधिक मजबूत और दीर्घकालिक सिमेंट बनाया जा सकता है।
आर्थिक एवं पर्यावरणीय प्रभाव
परम्परागत किल्न में 1 टन क्लिंकर के लिये 0.25 टन कोयला की आवश्यकता होती है, जबकि प्लाज़्मा‑रूट में केवल 0.72 टन कोयला‑समतुल्य ऊर्जा चाहिए। नाभिकीय विकल्प के साथ यह आंकड़ा 36 ग्राम रेडियोएक्टिव सामग्री तक गिर जाता है, जो 20,000 kg कोयले के बराबर है। SMR‑प्लाज़्मा संयंत्रों की आयु 60 वर्ष से अधिक होने की संभावना है, जबकि कोयला‑आधारित संयंत्रों की आयु लगभग 20 वर्ष होती है।
वैश्विक संदर्भ
स्वीडन की Heidelberg Materials और यूएस फ़्लोरिडा विश्वविद्यालय ने पहले ही पायलट‑स्केल में प्लाज़्मा किल्न चलाकर CO₂‑आधारित क्लिंकर उत्पादन सफलतापूर्वक किया है। इस प्रकार INSWAREB का प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक संभावित मानक बन सकता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that adopting nuclear‑powered plasma cement could slash global cement‑related emissions by up to 90 %, aligning with the Paris Agreement targets and creating a circular economy for industrial waste.
"यदि नाभिकीय‑प्लाज़्मा तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए तो सिमेंट उद्योग का कार्बन फुटप्रिंट लगभग शून्य हो सकता है," प्रो. अजय सिंह, पर्यावरण विज्ञान विशेषज्ञ ने कहा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) सुरक्षित हैं?
उत्तर: SMR को कई सुरक्षा स्तरों से लैस किया गया है और पारंपरिक बड़े रिएक्टरों की तुलना में जोखिम कम माना जाता है।
प्रश्न 2: इस तकनीक की लागत कितनी होगी?
उत्तर: प्रारंभिक पूँजी खर्च उच्च है, परन्तु कार्बन फ़ंड और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता से इसे व्यावहारिक बनाया जा सकता है।