उपमुख्यमंत्री जी. परameshwara ने कहा कि 1976 के बाद से दर्ज चार सबसे खराब वर्षा में से एक है। अगले कैबिनेट में 102 तालुकों को सूखा‑प्रभावित घोषित किया जाएगा।
- राज्य के 102 तालुकों को सूखा‑प्रभावित घोषित किया जाएगा।
- जून‑अगस्त तक वर्षा में 31% की कमी दर्ज।
- पीछे हटाने के लिए अब तक ₹306 करोड़ जल राहत के लिए जारी।
उपमुख्यमंत्री जी. परameshwara ने विधानसभा में बताया कि कर्नाटक में वर्तमान वर्षा कमी 1976 के बाद से दर्ज चार सबसे खराब मामलों में से एक है। उन्होंने कहा कि 102 तालुकों को अगली कैबिनेट बैठक में सूखा‑प्रभावित घोषित किया जाएगा और फिर केंद्र से सहायता हेतु मेमोरैंडम भेजा जाएगा।
कुल 240 में से 175 तालुकों में वर्षा की कमी है, जबकि 14 तालुकों में यह कमी अत्यधिक है। राज्य ने 102 तालुकों के लिए "ग्राउंड‑ट्रुथिंग" कार्य पूरा कर लिया है, और शेष तालुकों में यह प्रक्रिया जारी रहेगी।
जून 1 से 24 अगस्त तक राज्य को केवल 454 मिमी वर्षा मिली, जबकि सामान्यतः 654 मिमी की अपेक्षा की जाती है। यह कुल 31% की कमी दर्शाता है, जिसमें उत्तर‑अंतरिक कर्नाटक में 31%, दक्षिण‑अंतरिक में 41% और मालनाड में 35% कमी देखी गई।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि सूखा‑घोषणा न केवल कृषि को प्रभावित करेगी, बल्कि जल‑सरकारी योजनाओं, ग्रामीण रोजगार और सामाजिक स्थिरता पर भी गहरा प्रभाव डालेगी।
"कर्नाटक के कृषि मंत्री ने कहा, 'सप्लाई नेटवर्क को सुदृढ़ करना अनिवार्य है', जिससे किसानों को समय पर पानी मिल सके।
सैटेलाइट‑आधारित मौसम पूर्वानुमान के अनुसार अगस्त के शेष भाग और सितंबर में भी वर्षा‑कमी जारी रहने की संभावना है। पिछले वर्ष की तुलना में जलाशयों में संग्रहित जल 679.6 टेमीसीएफटी है, जबकि पिछले साल इस अवधि में 790 टेमीसीएफटी था।
पेयजल की स्थिति को देखते हुए 758 गांवों और 114 शहरी वार्डों में टैंकर द्वारा पानी सप्लाई किया जा रहा है। यदि स्थिति बिगड़ती है तो अगले गर्मियों में 2,059 गांवों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
कृषि क्षेत्र में केवल 71% लक्षित क्षेत्र बोया गया है; लक्ष्य 84.10 लाख हेक्टेयर था, जबकि केवल 60 लाख हेक्टेयर ही बुआई हुई। 132 तालुकों में गंभीर भू‑जल तनाव है, जिससे जल‑संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है।
Frequently Asked Questions
Q: सूखा‑घोषणा का किसानों और सामान्य जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A: यह घोषणा केंद्र से अतिरिक्त वित्तीय और तकनीकी सहायता को तेज़ करेगी, साथ ही जल‑संरक्षण उपायों को प्राथमिकता देगी।
Q: केंद्र सरकार से किस प्रकार की सहायता की उम्मीद है?
A: केंद्र के 2020 के सूखा‑मैनुअल के तहत वित्तीय अनुदान, ड्रिप इरिगेशन समर्थन और आपातकालीन जल सप्लाई सहायता की आशा है।