आंध्र प्रदेश सरकार नागार्जुन सागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व और नल्लामाला पहाड़ियों में बाघों के लिए शिकार का आधार बढ़ाने हेतु मध्य भारत से गौर (भारतीय भैंसों) को लाने की तैयारी कर रही है। इस कदम से न केवल खाद्य श्रृंखला मजबूत होगी, बल्कि बाघों की आबादी में भी सुधार होगा।

मुख्य बिंदु

  • नागार्जुन सागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) में शिकार की कमी को पूरा करने के लिए मध्य भारत से गौर लाए जाएंगे।
  • महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से चार बाघिनों को भी आंध्र प्रदेश लाया जाएगा।
  • यह परियोजना वन्यजीवों की आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
  • सितंबर से स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

आंध्र प्रदेश के वन विभाग ने नागार्जुन सागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) और नल्लामाला जंगलों में बाघों और तेंदुओं के लिए शिकार के आधार (Prey Base) को बढ़ाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। पिछले कुछ वर्षों में शिकार, आवास की हानि और पशु रोगों के कारण इन क्षेत्रों से गौर (Indian Bison) लगभग गायब हो गए थे।

मुख्य वन संरक्षक (PCCF) पी.वी. चपथी राव ने बताया कि वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की मदद से सितंबर से मध्य भारत से गौर का स्थानांतरण किया जाएगा। वर्तमान में, ये वन्यजीव पापीकोंडा नेशनल पार्क और अल्लूरी सीता राम राजू जिले के कुछ हिस्सों में सीमित हैं। गौर का पुनरुद्धार न केवल बाघों के लिए भोजन सुनिश्चित करेगा, बल्कि पूर्वी घाटों में मांसाहारी आबादी के अस्तित्व के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में शीर्ष शिकारी जैसे बाघों की उत्तरजीविता उनके शिकार की उपलब्धता पर निर्भर करती है। गौर जैसे बड़े शाकाहारी जीवों की अनुपस्थिति से खाद्य श्रृंखला टूट जाती है, जिससे बाघों की संख्या में गिरावट आती है। गौर का पुनरुद्धार पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक है।

टाइगर एक शीर्ष शिकारी है और उनकी उपस्थिति वन्यजीव आवासों के स्वास्थ्य का सबसे बड़ा संकेतक है।

इसके साथ ही, महाराष्ट्र के चंद्रपुर और मध्य प्रदेश से चार बाघिनों के स्थानांतरण की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। NSTR भारत का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जो लगभग 5,443 वर्ग किमी में फैला हुआ है। हालिया अनुमानों के अनुसार, इस क्षेत्र में 68 बाघ और 11 शावक दर्ज किए गए हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

नल्लामाला पहाड़ियां और पूर्वी घाट का क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध रहा है, लेकिन मानवीय हस्तक्षेप और अवैध शिकार ने यहाँ के बड़े स्तनधारियों को गंभीर संकट में डाल दिया है। गौर का गायब होना इस बात का संकेत था कि जंगल का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है।

क्या आप जानते हैं?: गौर दुनिया के सबसे बड़े जंगली आर्टियोडेक्टाइल (खुर वाले जानवर) हैं, जो काफी शक्तिशाली और विशाल होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: गौर को आंध्र प्रदेश क्यों लाया जा रहा है?
उत्तर: बाघों के लिए पर्याप्त शिकार उपलब्ध कराने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए।

प्रश्न 2: बाघिनों को कहाँ से लाया जा रहा है?
उत्तर: बाघिनों को महाराष्ट्र के चंद्रपुर और मध्य प्रदेश से लाया जा रहा है।