भारत ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 300 GW गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। यह कदम देश के 2030 और 2035 के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्य बातें
- भारत ने 300 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल कर ली है।
- यह 2030 तक के 500 GW के लक्ष्य का 60% से अधिक है।
- सौर ऊर्जा (Solar Power) इस हरित क्रांति का मुख्य चालक बनकर उभरी है।
- भारत ने 2035 के लिए अपने संशोधित जलवायु लक्ष्यों (NDCs) की घोषणा की है।
नई दिल्ली: भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में एक नया अध्याय जुड़ गया है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, भारत ने 31 जुलाई, 2026 तक 300 GW की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता प्राप्त कर ली है। यह उपलब्धि देश के 2030 तक 500 GW क्षमता हासिल करने के लक्ष्य का 60% से अधिक है।
इस विशाल क्षमता में सौर, पवन, जलविद्युत, बायो-पावर और परमाणु ऊर्जा का योगदान शामिल है। विशेष रूप से, सौर ऊर्जा ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। भारत की स्थापित सौर क्षमता 2014 के मात्र 2.8 GW से बढ़कर अब 164.59 GW हो गई है, जो इसे गैर-जीवाश्म क्षमता का सबसे बड़ा हिस्सा बनाती है।
ऊर्जा स्रोतों का तुलनात्मक विवरण
| ऊर्जा का स्रोत | स्थापित क्षमता (GW) |
|---|---|
| सौर ऊर्जा (Solar) | 164.59 |
| पवन ऊर्जा (Wind) | 58.14 |
| जलविद्युत (Hydro) | 57.24 |
| बायो-पावर (Bio-power) | 11.75 |
| परमाणु ऊर्जा (Nuclear) | 8.78 |
क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मील का पत्थर केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। भारत ने 2035 के लिए अपने Nationally Determined Contributions (NDCs) को संशोधित किया है, जिसके तहत 2035 तक कुल स्थापित क्षमता का कम से कम 60% गैर-जीवाश्म स्रोतों से होने का लक्ष्य है।
अक्षय ऊर्जा का यह विस्तार भारत को वैश्विक हरित अर्थव्यवस्था के केंद्र में स्थापित करने की क्षमता रखता है।
हालांकि, इस यात्रा में एक बड़ी चुनौती ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) की है। सौर और पवन ऊर्जा की अनिश्चितता को देखते हुए, बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए उन्नत बैटरी और स्टोरेज सिस्टम का विकास करना अनिवार्य होगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत ने पेरिस समझौते के बाद से अपनी ऊर्जा नीतियों में आमूल-चूल परिवर्तन किए हैं। 2014 में सौर ऊर्जा की स्थिति अत्यंत सीमित थी, लेकिन पिछले एक दशक में नीतिगत सुधारों और घरेलू विनिर्माण में वृद्धि ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े अक्षय ऊर्जा बाजारों में से एक बना दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. भारत का 2030 तक अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य क्या है?
भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता प्राप्त करना है।
2. ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता (GEI) क्या है?
GEI प्रति इकाई उत्पाद उत्पादन (जैसे सीमेंट या स्टील) के दौरान उत्सर्जित होने वाली ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा है।