ग्रेट निकोबार द्वीप (GNI) परियोजना को लेकर विवाद गहरा गया है। जनजातीय परिषद ने पूर्व मुख्य सचिव पर आरोप लगाया है कि वे शोम्पेन जनजाति को उनकी पारंपरिक जीवनशैली छोड़कर 'आधुनिकता' अपनाने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

मुख्य बातें

  • जनजातीय परिषद ने प्रशासन पर शोम्पेन जनजाति की संस्कृति को खतरे में डालने का आरोप लगाया।
  • पूर्व मुख्य सचिव पर जनजाति को 'आधुनिक जीवनशैली' अपनाने के लिए कहने का दावा।
  • ग्रेट निकोबार द्वीप (GNI) परियोजना के तहत गैलाथिया में पावर प्लांट का प्रस्ताव।
  • शोम्पेन एक अत्यंत संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTG) है जिसकी आबादी 300 से कम है।

अंडमान और निकोबार द्वीप प्रशासन और स्थानीय जनजातीय नेताओं के बीच टकराव बढ़ गया है। ग्रेट निकोबार द्वीप (GNI) विकास परियोजना के तहत, जनजातीय परिषद ने आरोप लगाया है कि प्रशासन शोम्पेन जनजाति, जो एक अत्यंत पृथक और स्वदेशी समुदाय है, को जबरन 'आधुनिक जीवनशैली' अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

परिषद के अनुसार, 16 जुलाई की एक बैठक के दौरान, तत्कालीन मुख्य सचिव चंद्र भूषण कुमार ने कथित तौर पर कहा था कि शोम्पेन लोग अपनी वर्तमान जीवनशैली के साथ 'जारी नहीं रह सकते' और उन्हें GNI विकास के साथ आने वाली 'आधुनिक जीवनशैली' को अपनाना होगा। यह विवाद तब सामने आया है जब गैलाथिया के पास, जो शोम्पेन बस्तियों के करीब है, एक बिजली संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव है।

यह क्यों मायने रखता है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल विकास का नहीं, बल्कि मानवाधिकारों और सांस्कृतिक अस्तित्व का है। शोम्पेन जनजाति को 'विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह' (PVTG) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उनकी आबादी 300 से भी कम है, जिससे किसी भी प्रकार का विस्थापन या सांस्कृतिक हस्तक्षेप उनके अस्तित्व के लिए घातक हो सकता है।

विकास की आड़ में स्वदेशी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को मिटाना एक गंभीर मानवाधिकार संकट पैदा कर सकता है।

इस बीच, निकोबारी जनजाति ने भी अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। उन्होंने मांग की है कि उन्हें उनके पूर्वजों के गांवों में वापस जाने दिया जाए और वन्यजीव अभयारण्यों की अधिसूचना के संबंध में उनकी सहमति क्यों नहीं ली गई, इस पर स्पष्टीकरण दिया जाए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

शोम्पेन जनजाति निकोबार द्वीप समूह की सबसे प्राचीन और सबसे कम आबादी वाली जनजातियों में से एक है। वे शिकारी-संग्रहकर्ता (hunter-gatherer) हैं और सदियों से जंगलों के साथ तालमेल बिठाकर रह रहे हैं। GNI परियोजना ₹91,000 करोड़ की एक विशाल योजना है, जिसका उद्देश्य द्वीप का व्यापक बुनियादी ढांचा विकास करना है।

क्या आप जानते हैं?: शोम्पेन जनजाति दुनिया की सबसे कम आबादी वाली जनजातियों में से एक है, जो पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. शोम्पेन जनजाति कौन है?
शोम्पेन एक अत्यंत संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTG) है जो निकोबार द्वीप समूह में रहता है और शिकार एवं संग्रहण पर निर्भर है।

2. GNI परियोजना क्या है?
ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना एक ₹91,000 करोड़ का बुनियादी ढांचा विकास प्रोजेक्ट है जिसमें हवाई अड्डा, बंदरगाह और पावर प्लांट शामिल हैं।