कोयंबटूर वन मंडल में कृषि क्षेत्रों में घुसने वाले जंगली हाथियों को रोकने के लिए वन विभाग ने रात की गश्त में तेजी ला दी है। 'वेट्टैय्यान' नामक एक आक्रामक हाथी की निगरानी के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं।
- कोयंबटूर वन मंडल में रात की गश्त करने वाली टीमों की संख्या 16 से बढ़ाकर 18 कर दी गई है।
- 'थडम' (Thadam) व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से किसानों को रीयल-टाइम अपडेट दिए जा रहे हैं।
- 'वेट्टैय्यान' नामक एक विशाल हाथी की निगरानी के लिए तीन विशेष टीमें तैनात की गई हैं।
कोयंबटूर: वन्यजीवों और मानव बस्तियों के बीच बढ़ते संघर्ष को देखते हुए, कोयंबटूर वन विभाग ने सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं। जिला वन अधिकारी एन. वेंगाटेस प्रभु ने पुष्टि की है कि रिज़र्व फॉरेस्ट क्षेत्रों की सीमा से सटे कृषि खेतों में घुसने वाले जंगली हाथियों को बाहर निकालने के लिए रात की गश्त को और अधिक गहन कर दिया गया है।
विभाग ने अब सात वन श्रेणियों के लिए सीमावर्ती रात्रि गश्त टीमों की संख्या को 16 से बढ़ाकर 18 कर दिया है। इस व्यापक अभियान में मदुक्कराई, बोलुवम्पट्टी, कोयंबटूर, पेरियानैckenपलायम, करमडाई, मेट्टुपलायम और सिरुमगाई के फ्रंटलाइन कर्मचारियों को तैनात किया गया है।
तकनीक और समुदाय का सहयोग
स्थानीय किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने आधुनिक संचार साधनों का उपयोग किया है। थोंडमथुर और थडागम क्षेत्रों के किसान 'थडम' (Thadam) नामक एक समर्पित व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से नियमित अपडेट प्राप्त कर रहे हैं। इस समूह में गश्ती टीमों के संपर्क नंबर साझा किए जाते हैं, जिससे किसान हाथियों की उपस्थिति दिखने पर तुरंत कार्रवाई कर सकें।
वन विभाग की यह त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।
'वेट्टैय्यान' का बढ़ता खतरा
इस पूरे मामले में सबसे अधिक चिंता का विषय 'वेट्टैय्यान' नामक एक जंगली हाथी है। यह हाथी नंजुंडपुरम, वरापलायम और थडागम के पास थिरुवल्लुवर नगर में लगातार देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हाथी ने घरों से पका हुआ भोजन, धान और पशु आहार तक खा लिया है, जिससे संपत्ति का काफी नुकसान हुआ है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि शहरी विस्तार और वन क्षेत्रों के बीच घटते बफर जोन के कारण हाथियों का मानव बस्तियों में प्रवेश एक गंभीर पारिस्थितिक और सामाजिक चुनौती बन गया है। कोयंबटूर की यह स्थिति पूरे दक्षिण भारत के लिए एक चेतावनी है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'थडम' व्हाट्सएप ग्रुप का क्या उद्देश्य है?
उत्तर: इसका उद्देश्य किसानों और वन विभाग के बीच तत्काल संचार स्थापित करना है ताकि हाथियों की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई की जा सके।
प्रश्न 2: किन क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई गई है?
उत्तर: मदुक्कराई, बोलुवम्पट्टी, कोयंबटूर, पेरियानैckenपलायम, करमडाई, मेट्टुपलायम और सिरुमगाई श्रेणियों में गश्त बढ़ाई गई है।