बीजीपी के मैसूर प्रवक्ता एम.ए. मोहन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर सभी नगर निकायों, उद्योगों और रिसॉर्ट्स को अपशिष्ट जल के उपचार को अनिवार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने काबिनी नदी में अत्यधिक प्रदूषण की तस्वीरें पेश कर इस मुद्दे की तात्कालिकता उजागर की।
- काबिनी नदी में अपशिष्ट जल का अनियंत्रित निकास सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहा है।
- सभी शहरी निकायों और उद्योगों के लिए STP/ETP की स्थापना अनिवार्य करने का प्रस्ताव।
- पायलट परियोजना के माध्यम से मॉडल बनाकर पूरे देश में लागू करने का आह्वान।
बीजीपी प्रवक्ता का आधिकारिक पत्र
बीजीपी के मैसूर क्षेत्र के प्रवक्ता एम.ए. मोहन ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने भारत की नदियों में अपशिष्ट जल के अनियंत्रित निकास को रोकने के लिए कड़े कदम मांगें। पत्र की एक प्रति The Hindu के साथ साझा की गई है।
काबिनी नदी की वर्तमान स्थिति
पत्र में काबिनी नदी का उदाहरण देते हुए कहा गया कि हालिया सूखे के कारण जलस्तर में अभूतपूर्व गिरावट आई, जिससे नदी के बिस्तर पर जमी हुई गंदगी और स्थिर प्रदूषित धारा स्पष्ट रूप से दिख रही है। सरगुड़ शहर (आबादी लगभग 50,000) और नदी के किनारे स्थित कई रिसॉर्ट व वाणिज्यिक इकाइयों से बिना उपचार के निकाले जाने वाले अपशिष्ट जल ने नदी को गंभीर रूप से दूषित किया है।
प्रभावित क्षेत्र और जनसंख्या
काबिनी नदी मैसूर शहर के लिए पीने के पानी का मुख्य स्रोत है और आगे त.नरासिपुर में कावेरी से मिलती है, फिर तमिलनाडु तक बहती है। स्रोत पर प्रदूषण का प्रभाव नीचे की सैकड़ों हजारों लोगों एवं वन्यजीवों तक पहुँचता है। हेग्गडदेवनकोटे क्षेत्र, जो घने जंगलों और जनजातीय बस्तियों से युक्त एक संवेदनशील इकोसिस्टम है, भी इस नदी के प्रवाह पर निर्भर है।
प्रस्तावित समाधान
मोहन ने सभी शहरी निकायों, उद्योगों, रिसॉर्ट्स और वाणिज्यिक इकाइयों को सेवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) या इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) स्थापित करने की अनिवार्यता पर बल दिया। साथ ही कड़ी निगरानी, नियमित निरीक्षण और उल्लंघन पर कठोर दंड की मांग की। उन्होंने काबिनी नदी पर एक पायलट परियोजना शुरू करने का प्रस्ताव रखा, जिससे एक व्यापक नदी प्रदूषण रोकथाम मॉडल तैयार किया जा सके।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that unchecked wastewater discharge not only threatens drinking water supplies but also jeopardizes agricultural productivity, biodiversity, and climate resilience across South India. Implementing mandatory treatment can set a precedent for the nation’s 12 major river basins.
"यदि जल उपचार को अनिवार्य नहीं किया गया तो अगले दशक में भारत में जलजनित बीमारियों में 30% तक वृद्धि हो सकती है," कहते हैं जलवायु विशेषज्ञ डॉ. रवींद्र सिंह।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या सभी छोटे शहरों को भी STP स्थापित करने की आवश्यकता होगी?
उत्तर: हाँ, प्रस्ताव में सभी शहरी निकायों, चाहे उनका आकार कुछ भी हो, को उपचार सुविधा स्थापित करने की अनिवार्यता शामिल है।
प्रश्न 2: इस पायलट परियोजना की लागत कौन उठाएगा?
उत्तर: सरकार के केन्द्र और राज्य दोनों स्तर पर सहयोग की अपेक्षा है, जिसमें केंद्रीय जल नीति के तहत फंडिंग प्रदान की जाएगी।