रोम और ज़ई व्हिटेकर द्वारा शादी के उपहारों से शुरू किया गया मद्रास क्रोकोडाइल बैंक ट्रस्ट अब 50 साल का हो गया है। चेन्नई स्थित यह संस्थान आज घड़ियालों, मगरमच्छों और कछुओं के संरक्षण का वैश्विक केंद्र बन चुका है।

  • मद्रास क्रोकोडाइल बैंक ट्रस्ट (MCBT) ने अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं।
  • इसकी शुरुआत 1976 में रोम और ज़ई व्हिटेकर ने शादी के उपहारों और सीमित संसाधनों से की थी।
  • वर्तमान में यहाँ 400 से अधिक मगरमच्छ और 32 अन्य सरीसृप प्रजातियाँ सुरक्षित हैं।
  • यह संस्थान घड़ियाल संरक्षण और सांप काटने के जोखिम को कम करने जैसे महत्वपूर्ण शोधों के लिए जाना जाता है।

चेन्नई के तट पर स्थित मद्रास क्रोकोडाइल बैंक ट्रस्ट (MCBT) ने अपने अस्तित्व के गौरवशाली 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं। जो सफर 1976 में एक छोटे से सपने और कुछ शादी के उपहारों से शुरू हुआ था, वह आज भारत में सरीसृप संरक्षण (Reptile Conservation) का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। ज़ई व्हिटेकर को आज भी वह पहला घड़ियाल याद है, जो एक साधारण से बॉक्स में उत्तर प्रदेश से चेन्नई पहुँचा था।

संस्थान की नींव तब रखी गई थी जब 1960 के दशक में खाल के लिए शिकार के कारण मगरमच्छों की आबादी तेजी से घट रही थी। प्रसिद्ध संरक्षणवादी रोमुलस 'रोम' व्हिटेकर ने ओडिशा में एक सर्वेक्षण के दौरान इस विचार को जन्म दिया था। उनका उद्देश्य एक ऐसी प्रजनन सुविधा बनाना था जहाँ से इन लुप्तप्राय प्रजातियों को पुनर्जीवित कर जंगलों में वापस छोड़ा जा सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मद्रास क्रोकोडाइल बैंक केवल एक चिड़ियाघर नहीं है, बल्कि एक जीवित प्रयोगशाला है। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में, विशेष रूप से घड़ियाल और मगरमच्छों जैसी प्रजातियों के लिए, यह संस्थान वैश्विक स्तर पर एक मॉडल के रूप में कार्य करता है। यह मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आज, 8.5 एकड़ के इस परिसर में 47 से अधिक घड़ियाल और 395 अन्य मगरमच्छ निवास करते हैं। यहाँ केवल मगरमच्छ ही नहीं, बल्कि कछुए, सांप और छिपकलियों की 32 अन्य प्रजातियाँ भी वैज्ञानिक देखरेख में रहती हैं। रोम और ज़ई ने यहाँ 'स्नेक बाइट मिटिगेशन प्रोजेक्ट' जैसे क्रांतिकारी कार्यक्रम भी शुरू किए हैं, जो भारत में सांप काटने की घटनाओं से होने वाली मौतों को कम करने में मदद करते हैं।

"घड़ियाल उस बॉक्स से सीधा पानी में गया, और तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा। यह संरक्षण की एक अटूट यात्रा की शुरुआत थी।" - ज़ई व्हिटेकर

संस्थान की सफलता के पीछे सैकड़ों हैंडलर, शोधकर्ता और स्वयंसेवक हैं। रोम और ज़ई ने न केवल इस ज़मीन को अपना घर बनाया, बल्कि अंडमान और निकोबार पर्यावरण टीम (ANET) जैसे महत्वपूर्ण उपक्रमों की भी नींव रखी। उनके योगदान ने भारत के वन्यजीव कानून और संरक्षण नीतियों को आकार देने में मदद की है।

Did You Know?: मद्रास क्रोकोडाइल बैंक की शुरुआत को वित्तपोषित करने के लिए रोम और ज़ई ने अपने कुछ व्यक्तिगत सामान, जैसे एक पुराना टेप रिकॉर्डर तक बेच दिया था।

Frequently Asked Questions

1. मद्रास क्रोकोडाइल बैंक की स्थापना कब हुई थी?
इसकी स्थापना 26 अगस्त, 1976 को रोम और ज़ई व्हिटेकर द्वारा की गई थी।

2. यहाँ कौन सी प्रजातियाँ पाई जाती हैं?
यहाँ मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुए, सांप और छिपकलियों सहित 32 से अधिक सरीसृप प्रजातियाँ हैं।