ग्लोबल वार्मिंग और प्रशांत डेकेडल ऑसिलेशन (PDO) के संयोजन से भूमध्य रेखा के पास बनने वाले विनाशकारी चक्रवातों की संख्या बढ़ सकती है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि समुद्री तापमान में बदलाव भारतीय मानसून और आपदाओं को प्रभावित करेगा।

  • प्रशांत महासागर में तापमान वृद्धि और PDO चक्र के कारण चक्रवातों का खतरा बढ़ेगा।
  • भूमध्य रेखा के पास बनने वाले चक्रवात अधिक तीव्र और विनाशकारी हो सकते हैं।
  • ग्लोबल वार्मिंग और समुद्री बदलावों का भारतीय मानसून पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।

हाल ही में Nature Communications जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग और प्रशांत डेकेडल ऑसिलेशन (PDO) नामक एक चक्रीय घटना के मेल से भारतीय तटों पर चक्रवातों की आवृत्ति में भारी वृद्धि हो सकती है। विशेष रूप से, वे चक्रवात जो भूमध्य रेखा (Equator) के पास उत्पन्न होते हैं, भविष्य में अधिक बार और अधिक तीव्रता के साथ देखने को मिल सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन का नया पैटर्न

दशकों से, भूमध्य रेखा के पास बनने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवात अपेक्षाकृत कम रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, 2017 में आया चक्रवात ओखी (Cyclone Okchi) एक बड़ी आपदा थी जिसने केरल, तमिलनाडु और श्रीलंका को प्रभावित किया था। अध्ययन बताता है कि 1981-2010 के दौरान ऐसे चक्रवातों की संख्या 1951-1980 की तुलना में 43% कम थी, क्योंकि उस समय PDO 'वार्म' या सकारात्मक चरण में था।

PDO और ENSO के बीच का अंतर

अक्सर लोग El Nino (एल नीनो) और La Nina (ला नीना) के बारे में सुनते हैं, जिसे सामूहिक रूप से ENSO कहा जाता है। यह घटना हर 2 से 7 साल में दोहराई जाती है। हालांकि, PDO इससे कहीं अधिक जटिल है। यह हर 20-30 साल में एक चक्र पूरा करता है। जब PDO अपने 'नेगेटिव' या ठंडे चरण में होता है, तो यह भूमध्य रेखा के पास चक्रवातों के निर्माण के लिए अनुकूल स्थितियां पैदा कर सकता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि समुद्री तापमान में यह सूक्ष्म बदलाव केवल मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की तटीय अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। यदि भूमध्य रेखा के पास पानी गर्म रहता है, तो चक्रवात अधिक नमी सोख लेते हैं, जिससे उनकी तीव्रता और विनाशकारी क्षमता बढ़ जाती है।

भूमध्य रेखा के पास चक्रवात बनना दुर्लभ है, लेकिन जब समुद्र का पानी गर्म होता है, तो वे अधिक नमी प्राप्त कर सकते हैं और तीव्रता में बढ़ सकते हैं। - डॉ. आर.एस. अजयमोहन

वर्तमान में, प्रशांत महासागर में एल नीनो विकसित हो रहा है, जिसका असर मध्य और दक्षिण भारत में वर्षा की कमी के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि PDO अपने ठंडे चरण में बना रहता है, तो मानसून के बाद के महीनों में चक्रवातों का खतरा काफी बढ़ जाएगा।

Did You Know?: प्रशांत डेकेडल ऑसिलेशन (PDO) एक ऐसी लंबी अवधि की समुद्री घटना है जिसे समझने में वैज्ञानिकों को कई वर्षों तक तापमान का डेटा एकत्र करना पड़ता है।

Frequently Asked Questions

1. क्या चक्रवात अधिक विनाशकारी होंगे?
हाँ, गर्म समुद्री तापमान चक्रवातों को अधिक ऊर्जा और नमी प्रदान करते हैं, जिससे उनकी तीव्रता बढ़ सकती है।

2. PDO का भारत पर क्या प्रभाव पड़ता है?
PDO का नकारात्मक चरण भारत में अधिक वर्षा ला सकता है, लेकिन यह चक्रवातों की आवृत्ति को भी बढ़ा सकता है।