दिल्ली सरकार के ₹2,500 करोड़ के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत, अक्टूबर-नवंबर तक 70 बड़ी मैकेनिकल रोड स्वीपर (MRS) मशीनें सड़कों पर तैनात की जाएंगी। यह कदम शहर में धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उठाया जा रहा है।
- अक्टूबर-नवंबर तक 70 बड़ी मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें सड़कों पर आएंगी।
- परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹2,500 करोड़ से अधिक होगी।
- प्रदूषण कम करने के लिए एंटी-स्मॉग गन युक्त वाटर स्प्रिंकलर मशीनें भी तैनात की जाएंगी।
- यह कार्य नगर निगम (MCD) द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा, लेकिन फंड दिल्ली सरकार देगी।
दिल्ली में वायु प्रदूषण और धूल के स्तर को नियंत्रित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। साढ़े तीन साल से अधिक की देरी और छूटी हुई समयसीमाओं के बाद, दिल्ली सरकार का ₹2,500 करोड़ से अधिक का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अब गति पकड़ रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, 70 बड़ी मैकेनिकल रोड स्वीपर (MRS) मशीनों का पहला बैच अक्टूबर-नवंबर तक दिल्ली की सड़कों पर दिखाई देगा।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सड़कों से उड़ने वाली धूल को कम करना है। सरकार ने निविदा (tender) प्रक्रिया के माध्यम से एक कंपनी का चयन कर लिया है और कार्य आदेश (work order) जारी कर दिया है। इस विशेष हिस्से की लागत अगले 10 वर्षों में लगभग ₹900 करोड़ होने का अनुमान है। हालांकि, यह पूरी परियोजना नगर निगम (MCD) द्वारा लागू की जाएगी, लेकिन इसका वित्तीय भार दिल्ली सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक
केवल बड़ी मशीनें ही नहीं, बल्कि सरकार छोटे स्तर पर भी सफाई व्यवस्था को मजबूत कर रही है। योजना के तहत 30 छोटी MRS मशीनें और 250 वाटर स्प्रिंकलर मशीनें तैनात की जाएंगी। इन स्प्रिंकलर मशीनों में एंटी-स्मॉग गन एकीकृत होंगी, जो हवा में पानी की महीन धुंध (mist) छिड़कती हैं, जिससे धूल के कण जमीन पर बैठ जाते हैं और हवा की गुणवत्ता में सुधार होता है।
मशीनीकृत सफाई और एंटी-स्मॉग तकनीक का संयोजन दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में महत्वपूर्ण सुधार ला सकता है।
ठोस कचरा प्रबंधन और आउटसोर्सिंग मॉडल
सड़कों से ठोस कचरा हटाने के लिए सरकार 1,000 'लीटर पिकर्स' (Litter Pickers) तैनात करने की प्रक्रिया में है। ये पिकर्स वैक्यूम क्लीनर की तरह काम करेंगे, जो लंबी लचीली पाइपों के माध्यम से कचरा इकट्ठा करेंगे। इस हिस्से के लिए लगभग ₹1,400 करोड़ का बजट प्रस्तावित है। महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार इन मशीनों को खरीदेगी नहीं, बल्कि निजी कंपनियों को आउटसोर्स करेगी। ये कंपनियां मशीनें और कर्मचारी दोनों प्रदान करेंगी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली में प्रदूषण का एक बड़ा कारण सड़कों की धूल है। पारंपरिक झाड़ू से सफाई करने पर धूल हवा में उड़ती है, जिससे AQI और खराब हो जाता है। मशीनीकृत सफाई और वैक्यूम तकनीक का यह एकीकरण न केवल सफाई को सुव्यवस्थित करेगा, बल्कि सर्दियों के दौरान होने वाले स्मॉग संकट को कम करने में भी मदद करेगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यह परियोजना पहली बार 28 जनवरी, 2023 को घोषित की गई थी। तब से लेकर अब तक, दिल्ली सरकार और MCD के बीच खींचतान, प्रशासनिक देरी और राजनीतिक बदलावों के कारण यह प्रोजेक्ट कई बार रुका। 2025 में सत्ता परिवर्तन के बाद, नई सरकार ने इस योजना को फिर से जीवंत किया है और अब इसे व्यापक रूप से लागू करने की तैयारी है।
Frequently Asked Questions
1. क्या सरकार खुद मशीनें खरीदेगी?
नहीं, सरकार मशीनों को निजी कंपनियों को आउटसोर्स करेगी जो संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगी।
2. इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य सड़कों से धूल प्रदूषण को कम करना और शहर की सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाना है।