चेन्नई के पास स्थित अग्रमथेन पवित्र उपवन की समृद्ध जैव विविधता को बचाने के लिए स्थानीय निवासियों ने इसे 'जैव विविधता विरासत स्थल' (BHS) घोषित करने की मांग की है। हालिया सर्वेक्षण में यहाँ 222 प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है।
- अग्रमथेन पवित्र उपवन में 222 विभिन्न प्रजातियां पाई गई हैं।
- स्थानीय निवासी और संरक्षणवादी इसे 'जैव विविधता विरासत स्थल' (BHS) बनाने की मांग कर रहे हैं।
- शहरीकरण, कचरा डंपिंग और प्रदूषण इस पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बड़े खतरे हैं।
चेन्नई के ताम्बरम जंक्शन से लगभग आठ किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित अग्रमथेन पवित्र उपवन (Agaramthen Sacred Grove) वर्तमान में अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों ने इस चार एकड़ के क्षेत्र को जैव विविधता विरासत स्थल (BHS) घोषित करने की पुरजोर मांग की है, ताकि बढ़ते शहरीकरण के बीच इसकी अद्वितीय पारिस्थितिकी को बचाया जा सके।
हाल ही में किए गए एक स्वतंत्र जैव विविधता सर्वेक्षण ने इस उपवन की महत्ता को उजागर किया है। शोधकर्ताओं ने यहाँ कुल 222 प्रजातियों को दर्ज किया है, जिसमें 102 पौधों की प्रजातियां, 60 पक्षी, 23 सरीसृप और उभयचर, सात स्तनधारी और 30 तितलियों की प्रजातियां शामिल हैं। यह सर्वेक्षण मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर जी. ज्ञानसेकरन और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के नेहरू प्रभाकरन के मार्गदर्शन में किया गया था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि चेन्नई जैसे तेजी से बढ़ते महानगर में इस तरह के छोटे वन क्षेत्र न केवल जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे स्थानीय समुदायों, जैसे कि पास की इरुला बस्ती, के लिए सांस्कृतिक और पारिस्थितिक आधार भी प्रदान करते हैं। यदि इन छोटे हरित क्षेत्रों को नहीं बचाया गया, तो शहर का तापमान बढ़ेगा और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।
जैसे-जैसे चेन्नई का शहरीकरण बढ़ रहा है, जैव विविधता और सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखने के लिए इन छोटे वन पैच का संरक्षण अनिवार्य है।
संरक्षणवादी तिरुमुरुगन वेदगिरी ने चेतावनी दी है कि यह उपवन वर्तमान में वनस्पतियों की कटाई, प्लास्टिक कचरे के डंपिंग और प्रदूषण जैसे गंभीर खतरों का सामना कर रहा है। इसके अलावा, आसपास की कृषि भूमि का आवासीय भूखंडों में परिवर्तन इस हरित क्षेत्र पर दबाव को और बढ़ा रहा है।
ऐतिहासिक संदर्भ और चुनौतियाँ
प्रोफेसर ज्ञानसेकरन ने चिदंबरम जिले के सेन्दिराकिलई पवित्र उपवन का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे कभी पूजनीय रहे ये स्थल समय के साथ उपेक्षा का शिकार हो जाते हैं। अग्रमथेन में भी स्थिति वैसी ही है, जहाँ देवी 'कन्नी अम्मन' के निवास के रूप में पूजनीय इस स्थान पर मानवीय हस्तक्षेप बढ़ रहा है।
| श्रेणी | दर्ज की गई प्रजातियां |
|---|---|
| पौधे | 102 |
| पक्षी | 60 |
| तितलियाँ | 30 |
| सरीसृप और उभयचर | 23 |
Frequently Asked Questions
1. अग्रमथेन पवित्र उपवन को BHS दर्जा क्यों चाहिए?
ताकि इसे कानूनी सुरक्षा मिल सके और शहरीकरण व प्रदूषण से होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
2. सर्वेक्षण में क्या महत्वपूर्ण जानकारी मिली?
सर्वेक्षण ने पहली बार इस क्षेत्र की विस्तृत प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया है, जो भविष्य के संरक्षण के लिए आधार बनेगा।