ग्लेशियोलॉजिस्ट डॉ. शकील अहमद रमोशू ने चेतावनी दी है कि हिमालय का तापमान वैश्विक औसत से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जिससे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) का खतरा बढ़ गया है।

  • हिमालय का तापमान पिछले 100 वर्षों में 1.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है।
  • ग्लेशियरों के पिघलने की दर पिछले दशक में दोगुनी हो गई है।
  • चेनाब और ज़ांस्कर घाटियों में ग्लेशियल झीलों का विस्तार हो रहा है।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और नदी बफर जोन की तत्काल आवश्यकता है।

प्रसिद्ध ग्लेशियोलॉजिस्ट और कुलपति डॉ. शकील अहमद रमोशू ने हाल ही में हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत टुडे को दिए एक साक्षात्कार में, उन्होंने बताया कि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक खामियाजा भुगत रहा है। उन्होंने विशेष रूप से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOFs) और लटकते ग्लेशियरों के टूटने के बढ़ते जोखिमों की ओर इशारा किया, जो नेपाल में हाल ही में हुई आपदा के बाद और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।

डॉ. रमोशू के आंकड़ों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में तापमान में वृद्धि की दर वैश्विक औसत से काफी अधिक है। जहाँ दुनिया भर में तापमान में 0.8 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि देखी गई है, वहीं हिमालय में यह वृद्धि 1.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गई है। यह अंतर इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को दर्शाता है और पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक गंभीर खतरे का संकेत देता है।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि हिमालयी ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया की जल सुरक्षा और करोड़ों लोगों के जीवन के लिए एक अस्तित्वगत संकट है। पिछले दस वर्षों में ग्लेशियरों के पिघलने की दर लगभग दोगुनी हो गई है, जिससे चेनाब और ज़ांस्कर घाटियों जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों का विस्तार हो रहा है।

ग्लेशियरों के पिघलने की दर में तेजी से वृद्धि हुई है, जो हिमालयी जल विज्ञान (hydrology) को मौलिक रूप से बदल रही है।

डॉ. रमोशू ने चेतावनी दी है कि हालांकि ग्लेशियरों के विस्फोट को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, लेकिन नुकसान को कम करने के लिए तकनीकी समाधानों को अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने निचले इलाकों में परिचालन प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning Systems) और सेंसर नेटवर्क की तैनाती पर जोर दिया।

इसके अलावा, उन्होंने उच्च ऊंचाई वाले जलविद्युत परियोजनाओं (hydropower projects) की व्यापक पर्यावरणीय समीक्षा करने और नदी बफर जोन के सख्त कार्यान्वयन की मांग की है। उन्होंने बढ़ते पर्यटन और तीर्थयात्राओं के नियमन की भी आवश्यकता बताई ताकि नाजुक पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र को बचाया जा सके।

Did You Know?: हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना न केवल बाढ़ का कारण बनता है, बल्कि यह भविष्य में नदियों के प्रवाह को भी अनिश्चित बना सकता है।

Frequently Asked Questions

1. GLOF क्या है?
GLOF का अर्थ है 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड', जो ग्लेशियर के पिघलने से बनी झीलों के अचानक फूटने से होने वाली विनाशकारी बाढ़ है।

2. हिमालय के तापमान में कितनी वृद्धि हुई है?
हिमालय में पिछले एक सदी में तापमान में 1.2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है, जो वैश्विक औसत से अधिक है।