ईरान के संघर्ष और प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों ने उर्वरक (fertilizer) के बाजार में भारी अस्थिरता पैदा कर दी है। यह लेख बताता है कि कैसे जीवाश्म ईंधन पर हमारी निर्भरता खाद्य कीमतों को अनिश्चित बना रही है और वैकल्पिक समाधान क्या हो सकते हैं।

  • प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल के कारण उर्वरक उत्पादन की लागत बढ़ गई है।
  • ईरान के संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से होने वाले उर्वरक व्यापार को बाधित किया है।
  • सूक्ष्मजीव आधारित (microbe-based) उर्वरक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने का एक आशाजनक विकल्प हैं।

हाल के महीनों में, जब आपने पेट्रोल पंप पर ईंधन भरवाया होगा या हवाई टिकट खरीदा होगा, तो आपने जीवाश्म ईंधन की बढ़ती कीमतों का अनुभव किया होगा। लेकिन किसानों के लिए यह संकट कहीं अधिक गहरा है। उर्वरक (Fertilizer) की कीमतें इस वर्ष एक रोलर कोस्टर की तरह रही हैं, जिसका मुख्य कारण प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव है, जो अमोनिया उत्पादन के लिए एक अनिवार्य घटक है।

ईरान के संघर्ष और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने इस संकट को और अधिक जटिल बना दिया है। उर्वरक व्यापार सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है क्योंकि वैश्विक समुद्री उर्वरक व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है, जो वर्तमान संघर्ष के कारण वाणिज्यिक यातायात के लिए लगभग बंद है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया के सबसे गरीब देशों के लिए उर्वरक तक पहुंच और भी कठिन हो सकती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कृषि और ऊर्जा क्षेत्र एक-दूसरे से अटूट रूप से जुड़े हुए हैं। जब प्राकृतिक गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तो अमोनिया उत्पादन महंगा हो जाता है, जिससे सीधे तौर पर यूरिया जैसी खाद की कीमतें बढ़ जाती हैं। अप्रैल में, यूरिया की कीमत $850 प्रति मीट्रिक टन से ऊपर निकल गई थी, जो संघर्ष से पहले की तुलना में 80% अधिक थी। यह केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा का एक गंभीर प्रश्न है।

"हम एक ऐसा समाज नहीं बना सकते जहां खाद्य श्रृंखला का आधार जीवाश्म ईंधन पर निर्भर हो।" - टिम श्नाबेल, सीईओ, Switch Bioworks

इस संकट का एक और पहलू पर्यावरण है। उर्वरक उत्पादन वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 2% हिस्सा है। इसलिए, जीवाश्म ईंधन पर हमारी निर्भरता न केवल हमारी जेब पर भारी पड़ रही है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन को भी बढ़ावा दे रही है। मध्य पूर्व में 31 अमोनिया संयंत्र प्रभावित या पूरी तरह से बंद हो गए हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में भारी व्यवधान आया है।

हालांकि, उम्मीद की एक किरण भी है। Pivot Bio और Switch Bioworks जैसी कंपनियां सूक्ष्मजीवों (microbes) का उपयोग करके उन्नत उर्वरक बनाने पर काम कर रही हैं। ये जैविक विकल्प प्राकृतिक गैस का उपयोग नहीं करते हैं, जिससे ये ऊर्जा कीमतों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहते हैं। वर्तमान में, ये उत्पाद सिंथेटिक उर्वरकों के लगभग 25% हिस्से को बदलने में सक्षम हैं, और भविष्य में इसे 50% तक ले जाने का लक्ष्य है।

Did You Know?: उर्वरक उत्पादन दुनिया के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 2% का योगदान देता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: उर्वरक की कीमतें प्राकृतिक गैस से क्यों जुड़ी हैं?
उत्तर: अमोनिया, जो उर्वरक का एक मुख्य घटक है, बनाने के लिए प्राकृतिक गैस का उपयोग ऊर्जा स्रोत और रासायनिक इनपुट दोनों के रूप में किया जाता है।

प्रश्न 2: क्या जैविक उर्वरक पूरी तरह से रासायनिक उर्वरकों की जगह ले सकते हैं?
उत्तर: वर्तमान में ये लगभग 25% तक प्रतिस्थापन कर सकते हैं, लेकिन वैज्ञानिक इसे भविष्य में 50% तक बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।