मसिनगुडी के सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय में छात्रों ने अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लिया। इको-वॉइस ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्धों के महत्व को दर्शाया।

  • मसिनगुडी में 55 छात्रों ने अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस पर भाग लिया।
  • इको-वॉइस ट्रस्ट ने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्राकृतिक रंगों (हल्दी, कॉफी, मिट्टी) का उपयोग किया।
  • नीलगिरी सफेद-पीठ वाले गिद्ध और भारतीय गिद्धों के लिए एक महत्वपूर्ण गढ़ है।

उधगमंडलम: अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस के उपलक्ष्य में, मसिनगुडी स्थित सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय में स्कूली छात्रों के लिए एक विशेष चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अनूठी पहल का उद्देश्य न केवल बच्चों की रचनात्मकता को निखारना था, बल्कि उन्हें पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्धों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में शिक्षित करना भी था। इस प्रतियोगिता में कुल 55 छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस कार्यक्रम की सबसे खास बात इसकी स्थिरता (sustainability) थी। इको-वॉइस ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में छात्रों को रासायनिक रंगों के बजाय पूरी तरह से प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। ये रंग अनाज (millets), हल्दी, कॉफी, चाय, मिट्टी और चारकोल से तैयार किए गए थे, जिससे छात्रों को प्रकृति के साथ जुड़ने का एक व्यावहारिक अनुभव मिला।

पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्धों का महत्व

इको-वॉइस ट्रस्ट के संस्थापक, मणिगंदन एस. ने कार्यक्रम के दौरान गिद्धों के संरक्षण की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि गिद्ध प्रकृति के 'सफाईकर्मी' हैं। मृत जानवरों के शवों को प्राकृतिक रूप से खाकर, वे बीमारियों के प्रसार को रोकने और पारिस्थितिकी तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

गिद्धों की आबादी की रक्षा करना जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नीलगिरी क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सफेद-पीठ वाले गिद्ध (White-rumped vulture) और भारतीय गिद्ध (Indian vulture) के लिए एक प्रमुख निवास स्थान है। ये प्रजातियां वर्तमान में संकटग्रस्त हैं, और नीलगिरी में इनकी मौजूदगी दक्षिण भारत में इनके अस्तित्व के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि इस तरह की जमीनी स्तर की शैक्षिक गतिविधियां भविष्य के पर्यावरण संरक्षणवादियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब बच्चे प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से पर्यावरण के बारे में सीखते हैं, तो संरक्षण के प्रति उनकी समझ अधिक गहरी और स्थायी होती है।

Did You Know?: गिद्धों के बिना, मृत जानवरों के अवशेषों से फैलने वाली बीमारियां मानव बस्तियों के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस कब मनाया जाता है?
उत्तर: यह हर साल 5 सितंबर को मनाया जाता है।

प्रश्न 2: इस प्रतियोगिता का आयोजन किसने किया?
उत्तर: इसका आयोजन इको-वॉइस ट्रस्ट ने केनरा बैंक, येलानाल्ली शाखा के सहयोग से किया गया था।