सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व के कंबथ्रायन पहाड़ियों में लगी भीषण आग को वन विभाग और ग्रामीणों ने तीन दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद बुझा दिया है। तेज हवाओं और सूखे घास के कारण आग तेजी से फैली थी।
- सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व के कंबथ्रायन पहाड़ियों में तीन दिनों तक भीषण आग लगी रही।
- 100 से अधिक वन कर्मियों और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर आग पर काबू पाया।
- तेज हवाएं, उच्च तापमान और सूखे लेमनग्रास ने आग फैलने में बड़ी भूमिका निभाई।
- ड्रोन के माध्यम से वनस्पति को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
तमिलनाडु के प्रसिद्ध सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व (STR) के कंबथ्रायन पहाड़ियों में मंगलवार रात से भड़की भीषण आग पर आखिरकार गुरुवार रात को नियंत्रण पा लिया गया। तीन दिनों तक चले इस खतरनाक संघर्ष में वन विभाग के 100 से अधिक कर्मियों और स्थानीय पहाड़ी निवासियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर आग को बुझाने का काम किया।
आग की लपटें मंगलवार (1 सितंबर) की रात से ही उठने लगी थीं और कठिन पहाड़ी इलाकों के कारण यह बहुत तेजी से फैल गई। रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में सूखे झाड़-झंखाड़, सूखी झाड़ू घास और लेमनग्रास की अत्यधिक वृद्धि ने ईंधन का काम किया, जिससे आग को फैलने में मदद मिली। इसके साथ ही, तेज हवाओं और बढ़ते तापमान ने बचाव कार्यों को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बाघ अभयारण्यों में इस तरह की आग न केवल वनस्पतियों को नष्ट करती है, बल्कि वन्यजीवों के पारिस्थितिक तंत्र और उनके आवास को भी स्थायी नुकसान पहुँचा सकती है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वाहनों का पहुंचना असंभव था, जिससे पूरी टीम को मैन्युअल रूप से काम करना पड़ा।
कठिन इलाके और तेज हवाओं के बावजूद, टीम ने हार नहीं मानी और अंततः आग को फैलने से रोक दिया।
सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक और फील्ड निदेशक, के. राजकुमार ने बताया कि बचाव दल ने उच्च तापमान और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए गुरुवार रात को आग पर काबू पाया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित क्षेत्र में अभी भी गश्त जारी है ताकि कोई भी चिंगारी दोबारा न भड़के।
वर्तमान में, वन विभाग ड्रोन तकनीक का उपयोग करके यह पता लगा रहा है कि आग के कारण कितनी हेक्टेयर वनस्पति और घास (विशेष रूप से सीमर घास) जलकर राख हो गई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व पश्चिमी घाट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह बाघों, तेंदुओं और हाथियों जैसे विभिन्न वन्यजीवों का घर है। इस क्षेत्र में वार्षिक रूप से गर्मियों और मानसून के संक्रमण काल के दौरान आग लगने की घटनाएं देखी जाती हैं, जो जैव विविधता के लिए एक बड़ा खतरा हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: आग लगने का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: सूखे लेमनग्रास, सूखी झाड़ियों की अधिकता और तेज हवाओं ने आग के प्रसार में मुख्य भूमिका निभाई।
प्रश्न 2: नुकसान का आकलन कैसे किया जा रहा है?
उत्तर: वन विभाग द्वारा ड्रोन का उपयोग करके प्रभावित क्षेत्र की वनस्पति के नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है।