कोयला मंत्रालय ने बताया कि सीमाओं के पुनः निर्धारण के बाद तारा कोयला ब्लॉक को हाथी कॉरिडोर के बाहर रखा गया है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा के बीच इस निर्णय को लेकर तीखा विवाद छिड़ा है।

  • तारा कोयला ब्लॉक को लेमरु हाथी कॉरिडोर से बाहर माना गया
  • कांग्रेस ने इस कदम को इकोसाइड का आरोप लगाया
  • भाजपा ने कांग्रेस के पिछले फैसलों पर सवाल उठाए

कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि तारा कोयला ब्लॉक को 2023 में प्रारंभिक रूप से नीलामी से हटाया गया था, क्योंकि छत्तीसगढ़ सरकार ने हैस्देओ‑अरंड क्षेत्र के भीतर स्थित ब्लॉकों को बाहर रखने की मांग की थी। बाद में, 11 दिसंबर 2025 को राज्य सरकार ने एक पत्र भेजा जिसमें बताया गया कि यह ब्लॉक लेमरु हाथी कॉरिडोर के बाहर स्थित है और अगले चरण की नीलामी में पेश किया जा सकता है।

पृष्ठभूमि

2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा ने हैस्देओ‑अरंडा में नए कोयला ब्लॉकों के खिलाफ सर्वसम्मत मतदान किया था। तब के कांग्रेस सरकार ने 2023 में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि नई खनन परियोजनाओं की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, कांग्रेस के जनरल सचिव (संचार) जयाराम रामेश ने 10 सितंबर 2026 को तारा ब्लॉक के खनन से 4,000 एकड़ घना जंगल और 10 लाख पेड़ गिरने की संभावना जताई। उन्होंने लेमरु हाथी रिज़र्व में कॉरिडोर को बाधित करने और संकटग्रस्त प्रजातियों को खतरे में डालने की चेतावनी भी दी।

भाजपा की प्रतिक्रिया

छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (CMDC) के अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता सौरभ सिंह ने कहा कि कांग्रेस ही इस खनन को संभव बनाने में मुख्य भूमिका निभा रही थी। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2021 में केंद्रीय कोयला मंत्री को तारा ब्लॉक को CMDC को आवंटित करने की औपचारिक अनुरोध किया था। सिंह ने यह भी बताया कि उस समय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के तब के मंत्री जयाराम रामेश ने वन सलाहकार समिति (FAC) की अनुशंसा न होने के बावजूद टारा और पर्सा ईस्ट एवं केटे बासन (PEKB) परियोजनाओं को मंजूरी दे दी थी।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the tug‑of‑war between central and state political parties over natural‑resource allocation not only influences regional economies but also sets precedents for environmental governance across India.

"If the revised boundaries are not transparently documented, it risks undermining public trust in both environmental and mineral policies," says Dr. Anjali Mehta, environmental policy expert.
Did You Know?: लेमरु हाथी रिज़र्व भारत के सबसे बड़े सतत हाथी प्रवास मार्गों में से एक है, जो हर साल लगभग 300 हाथियों को जोड़ता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: तारा कोयला ब्लॉक का वर्तमान स्थितिकरण क्या है?

उत्तर: मंत्रालय के अनुसार, ब्लॉक अब लेमरु हाथी कॉरिडोर के बाहर माना गया है और अगले चरण की नीलामी में पेश किया जा सकता है।

प्रश्न 2: इस निर्णय का पर्यावरणीय प्रभाव क्या हो सकता है?

उत्तर: यदि ब्लॉक वास्तव में कॉरिडोर से बाहर है तो संभावित वन कटाई और हाथी प्रवास में बाधा कम हो सकती है, परन्तु विस्तृत पर्यावरणीय मूल्यांकन अभी भी आवश्यक है।