भारत अपनी 11,000 किमी से अधिक लंबी तटरेखा को बचाने के लिए 'जन आंदोलन' का सहारा ले रहा है। 'स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर' अभियान के माध्यम से लाखों नागरिक समुद्री प्रदूषण के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं।
- भारत की 11,098 किमी लंबी तटरेखा को प्लास्टिक और माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण से बचाने के लिए व्यापक अभियान।
- 'स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर' (Sagar 5.0) अब एक सरकारी कार्यक्रम से बदलकर एक व्यापक 'जन आंदोलन' बन चुका है।
- भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल, और लाखों स्वयंसेवकों की भागीदारी से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण।
भारत की 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा सदियों से व्यापार, संस्कृति और जीवन का आधार रही है। लेकिन समय के साथ, यह समृद्ध विरासत प्लास्टिक कचरे और प्रदूषण की चपेट में आ गई। आज समुद्र की लहरें केवल सीपियां या मछलियां नहीं, बल्कि प्लास्टिक की बोतलें और पुराने मछली पकड़ने के जाल लेकर आती हैं। यह केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं है, बल्कि एक गंभीर संकट है क्योंकि माइक्रोप्लास्टिक अब समुद्री भोजन के जरिए मानव शरीर में प्रवेश कर रहा है।
लंबे समय तक, तटीय प्रबंधन को केवल आपदा प्रबंधन (जैसे चक्रवात) के नजरिए से देखा गया। दैनिक संरक्षण और नागरिक भागीदारी की कमी थी। इस स्थिति को बदलने के लिए, केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन की तर्ज पर समुद्री स्वच्छता को एक 'जन आंदोलन' बनाने का निर्णय लिया। इसी सोच का परिणाम 2022 में शुरू हुआ 'स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर' अभियान है, जो अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस (International Coastal Cleanup Day) के साथ मिलकर काम करता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह अभियान केवल कचरा उठाने के बारे में नहीं है, बल्कि यह भारत की 'ब्लू इकोनॉमी' (Blue Economy) को सुरक्षित करने की एक रणनीतिक कोशिश है। जब नागरिक समुद्र को अपनी साझा विरासत के रूप में देखते हैं, तो संरक्षण की जिम्मेदारी सरकार से हटकर समाज पर आती है, जिससे परिणाम अधिक स्थायी होते हैं।
इस अभियान का विस्तार आश्चर्यजनक रहा है। पहले वर्ष में यह केवल 75 स्थानों तक सीमित था, लेकिन अब यह 800 से अधिक तटीय स्थानों तक फैल चुका है। स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0 के तहत भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल, NCC, NSS और विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थाएं एक साथ काम कर रही हैं। चेन्नई का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT) और हैदराबाद का INCOIS जैसे संस्थान इस वैज्ञानिक अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।
"समुद्री स्वच्छता अब एक विकल्प नहीं, बल्कि अस्तित्व की आवश्यकता है क्योंकि हमारा स्वास्थ्य सीधे तौर पर हमारे महासागरों के स्वास्थ्य से जुड़ा है।"
अभियान में मछुआरों और महिला समूहों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे समुद्र के सबसे करीब हैं। यह भागीदारी दर्शाती है कि कैसे 'मिशन लाइफ' (Mission LiFE) के तहत पर्यावरण के प्रति जीवनशैली में बदलाव लाया जा रहा है।
| विशेषता | प्रारंभिक चरण (Sagar 1.0) | वर्तमान चरण (Sagar 5.0) |
|---|---|---|
| पहुंच (स्थान) | 75 स्थान | 800+ स्थान |
| भागीदारी | मुख्यतः सरकारी संस्थान | नौसेना, NGO, छात्र और नागरिक |
| दृष्टिकोण | प्रशासनिक सफाई | व्यापक जन आंदोलन (Jan Andolan) |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर' अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य भारत की तटरेखा से प्लास्टिक कचरे को हटाना और नागरिकों में समुद्री पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना है।
प्रश्न 2: अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस कब मनाया जाता है?
उत्तर: यह हर साल सितंबर के तीसरे शनिवार को मनाया जाता है।