असम में दशकों के समर्पित संरक्षण प्रयासों के कारण संकटग्रस्त पाइग्मी हॉग की आबादी में भारी उछाल आया है। 1996 में मात्र 6 बचे इन जीवों की संख्या अब बढ़कर 194 हो गई है।
- पाइग्मी हॉग की आबादी 1996 के 6 से बढ़कर अब 194 हो गई है।
- कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोग्राम के माध्यम से यह सफलता हासिल की गई है।
- लक्ष्य 2040 तक इनकी संख्या को 300 तक पहुँचाना है।
- ये जीव अब मानस और ओरंग जैसे राष्ट्रीय उद्यानों में पाए जाते हैं।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल ही में संकटग्रस्त पाइग्मी हॉग (Porcula salvania) की आबादी में हुई वृद्धि को एक 'बड़ी वापसी' (Big Comeback) करार दिया है। कभी विलुप्त होने की कगार पर खड़े इस छोटे से जीव ने संरक्षणवादियों के दशकों के कठिन परिश्रम के बाद एक नई उम्मीद जगाई है।
पाइग्मी हॉग दुनिया का सबसे छोटा और दुर्लभ जंगली सूअर है, जिसकी ऊंचाई लगभग 25 सेमी और वजन अधिकतम 9.7 किलोग्राम तक होता है। यह प्रजाति घास के मैदानों के स्वास्थ्य का संकेत देने वाला एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो केवल भारत में ही पाया जाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पाइग्मी हॉग के संरक्षण का इतिहास काफी पुराना है। ब्रिटिश प्रकृतिवादी जेराल्ड डुरेल और उनके ट्रस्ट ने 1971 में इस दिशा में पहल की थी। हालांकि, आधुनिक संरक्षण अभियान 1996 में शुरू हुआ जब संरक्षणवादियों ने मानस नेशनल पार्क के बांसबारी रेंज से केवल छह पाइग्मी हॉग को पकड़ा था। इन्हें गुवाहाटी के दक्षिणी छोर पर एक प्रजनन केंद्र में लाया गया था।
संरक्षण का मॉडल और सहयोग
पाइग्मी हॉग कंजर्वेशन प्रोग्राम (PHCP) एक वैश्विक सहयोग का परिणाम है। इसमें डुरेल वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (UK), असम वन विभाग, IUCN का वाइल्ड पिग स्पेशलिस्ट ग्रुप और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर, आरण्यक और इकोसिस्टम्स इंडिया इस कार्यक्रम को जमीन पर लागू कर रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पाइग्मी हॉग की सफलता केवल एक प्रजाति को बचाने के बारे में नहीं है, बल्कि यह पूरे घास के मैदान के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इन जीवों की उपस्थिति स्वस्थ घास के मैदानों का प्रमाण है, जो अन्य कई प्रजातियों के लिए भी जीवन रेखा है।
पाइग्मी हॉग की वापसी यह साबित करती है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण हो, तो विलुप्त होती प्रजातियों को भी पुनर्जीवित किया जा सकता है।
वर्ष 2008 से इन जीवों को वापस जंगल में छोड़ना शुरू किया गया था। वर्तमान में, ये जीव सोनई-रुपई वन्यजीव अभयारण्य, बोर्नदी वन्यजीव अभयारण्य, ओरंग नेशनल पार्क और मानस नेशनल पार्क में सफलतापूर्वक निवास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने लक्ष्य रखा है कि 2040 तक इनकी संख्या 300 तक पहुंचाई जाए ताकि वे प्रकृति में आत्मनिर्भर हो सकें।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पाइग्मी हॉग की वर्तमान आबादी कितनी है?
उत्तर: वर्तमान में इनकी आबादी लगभग 194 है, जो 1996 में केवल 6 थी।
प्रश्न 2: ये जीव किन राष्ट्रीय उद्यानों में पाए जाते हैं?
उत्तर: ये मुख्य रूप से मानस, ओरंग, सोनई-रुपई और बोर्नदी वन्यजीव अभयारण्यों में पाए जाते हैं।