कन्नूर के मडयिपारा पठार की जैव विविधता को वाहनों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए मदयी तिरुवरकट्टुकेवु देवस्वम ने पत्थर की सीमा दीवार का निर्माण शुरू कर दिया है।

  • मडयिपारा के नाजुक पारिस्थितिक तंत्र को बचाने के लिए पत्थर की दीवार का निर्माण शुरू।
  • वाहनों के प्रवेश को रोकने का लक्ष्य, जिससे दुर्लभ वनस्पतियों को नुकसान हो रहा था।
  • पर्यावरणविदों ने अनियंत्रित पर्यटन और अवैध ईको-पार्क के खिलाफ विरोध तेज किया है।

कन्नूर के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील और जैव विविधता से भरपूर मडयिपारा पठार को बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मदयी तिरुवरकट्टुकेवु देवस्वम ने एरिपुरम से नौसेना अकादमी की ओर जाने वाली सड़क के किनारे एक पत्थर की सीमा दीवार का निर्माण शुरू कर दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पठार के भीतर वाहनों के अनियंत्रित प्रवेश को रोकना है, जो यहाँ की दुर्लभ वनस्पतियों और भू-दृश्य को गंभीर नुकसान पहुँचा रहे हैं।

देवस्वम अधिकारियों के अनुसार, यह निर्माण कार्य सीधे तौर पर किया जा रहा है और इसका उद्देश्य उन संवेदनशील पहुंच बिंदुओं को कवर करना है जहाँ से वाहन सबसे अधिक प्रवेश करते हैं। वर्तमान में, दीवार का निर्माण वडुकुंडा शिव मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर किया जा रहा है। हालांकि, इसके लिए अभी तक कोई विशिष्ट बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है, क्योंकि इसे तत्काल सुरक्षा उपाय के रूप में अपनाया गया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मडयिपारा जैसे नाजुक पारिस्थितिक तंत्र के लिए मानव हस्तक्षेप एक बड़ा खतरा बन गया है। अनियंत्रित पर्यटन, कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था और पर्यटकों द्वारा छोड़े गए कचरे ने यहाँ के पक्षियों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को बाधित कर दिया है।

वाहनों का प्रवेश और प्लास्टिक कचरा मडयिपारा की नाजुक जैव विविधता के लिए एक अस्तित्वगत खतरा बन गया है।

मडयिपारा संरक्षण समिति और पर्यावरण समूहों ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का कहना है कि छुट्टियों और शाम के समय यहाँ सैकड़ों वाहनों का जमावड़ा देखा जाता है। हालांकि जागरूकता अभियान चलाए गए हैं, लेकिन लोग अभी भी घास के मैदानों में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे मिट्टी का कटाव और पौधों का विनाश हो रहा है।

ऐतिहासिक और पारिस्थितिक पृष्ठभूमि

3.65 वर्ग किलोमीटर में फैला यह लैटेराइट पठार असाधारण जैव विविधता का केंद्र है। यहाँ फूलों के पौधों की 670 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें 14 प्रजातियां IUCN द्वारा खतरे की श्रेणी में रखी गई हैं। इसके अलावा, यह 258 पक्षी प्रजातियों का घर है, जिनमें से कई वैश्विक स्तर पर लुप्तप्राय हैं।

विशेषताविवरण
क्षेत्रफल3.65 वर्ग किमी
फूलों के पौधों की प्रजातियां670
पक्षी प्रजातियां258
खतरे वाली प्रजातियां (IUCN)14

पर्यावरणविदों ने पहले भी केरल उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला दिया है, जिसमें जिला पुलिस को इस क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। देवस्वम का मानना है कि कांटेदार बाड़ जैसे अस्थायी उपाय विफल रहे हैं, इसलिए एक स्थायी पत्थर की दीवार ही दीर्घकालिक समाधान है।

क्या आप जानते हैं?: मडयिपारा में 11 कीटभक्षी (insectivorous) पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं, जो इसे वैज्ञानिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: देवस्वम दीवार क्यों बना रहा है?
उत्तर: वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए ताकि पठार की दुर्लभ वनस्पतियों और जैव विविधता को बचाया जा सके।

प्रश्न 2: मडयिपारा में किस प्रकार का खतरा है?
उत्तर: अनियंत्रित पर्यटन, प्लास्टिक कचरा और वाहनों से होने वाला पारिस्थितिक नुकसान सबसे बड़ा खतरा है।