पोकेमॉन कंपनी ने वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए अपनी लॉटरी-आधारित टिकटिंग प्रणाली से जुड़ी निराशा को स्वीकार किया है, जहाँ 50,000 सीटों के लिए 1.3 लाख से अधिक प्रशंसकों ने आवेदन किया था। अधिकारियों का दावा है कि इतनी भारी मांग को संभालने के लिए वर्तमान में कोई बेहतर विकल्प नहीं है।
- केवल 50,000 उपलब्ध स्थानों के लिए 1,30,000 से अधिक प्रशंसकों ने लॉटरी में भाग लिया।
- पोकेमॉन ईस्पोर्ट्स डायरेक्टर क्रिस ब्राउन ने स्वीकार किया कि 'निराशा का स्तर' एक बड़ी समस्या है।
- लॉटरी सिस्टम का उपयोग विशेष रूप से सर्वर क्रैश को रोकने और स्कैल्पर्स (टिकट कालाबाजारी) को रोकने के लिए किया गया।
- वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए अगले साल की वर्ल्ड चैंपियनशिप सिंगापुर में आयोजित की जाएगी।
सैन फ्रांसिस्को में हाल ही में संपन्न हुई पोकेमॉन वर्ल्ड चैंपियनशिप और XP फैन कन्वेंशन ने जहां एक ओर शानदार मुकाबले दिखाए, वहीं दूसरी ओर कई विवादों को भी जन्म दिया। इवेंट के दौरान चोरी, टिकटों की कालाबाजारी और अत्यधिक भीड़ के कारण फायर मार्शल द्वारा कुछ हिस्सों को बंद किए जाने की खबरें आईं। हालांकि, सबसे बड़ी शिकायत इवेंट में प्रवेश के लिए इस्तेमाल की गई 'खराब' लॉटरी प्रणाली को लेकर रही।
IGN के साथ एक साक्षात्कार में, पोकेमॉन ईस्पोर्ट्स डायरेक्टर क्रिस ब्राउन ने मांग और आपूर्ति के बीच के चौंकाने वाले अंतर का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जहाँ 50,000 लोग इवेंट में शामिल हो सके, वहीं लगभग 1,30,000 लोगों ने लॉटरी में हिस्सा लिया था। ब्राउन ने कहा कि आम जनता इस बात से अनजान है कि मांग का स्तर कितना अधिक है, जिससे टिकट न मिलने पर प्रशंसकों में भारी निराशा फैलती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि पोकेमॉन कंपनी 'सफलता के संकट' का सामना कर रही है। ब्रांड की विस्फोटक वृद्धि पारंपरिक कन्वेंशन सेंटरों की भौतिक क्षमता से कहीं अधिक हो गई है। 'पहले आओ, पहले पाओ' के बजाय लॉटरी पर भरोसा करके, कंपनी निष्पक्षता बनाए रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन ऐसा करके उन्होंने लाखों वैश्विक प्रशंसकों के लिए एक मानसिक 'निराशा की परत' (disappointment layer) बना दी है।
यह समस्या केवल मुख्य टिकटों तक सीमित नहीं है। ऑटोग्राफ सेशन और लिमिटेड एडिशन मर्चेंडाइज जैसे प्रीमियम अनुभव भी केवल कुछ ही भाग्यशाली लोगों के लिए उपलब्ध होते हैं। ब्राउन ने स्वीकार किया कि कंपनी इस बात पर विचार कर रही है कि क्या इन दुर्लभ अनुभवों का मूल्य उस व्यापक निराशा से अधिक है जो अन्य प्रशंसकों को होती है।
"दार्शनिक समस्या यह है कि आपूर्ति मांग के स्तर से बहुत नीचे है; बॉट्स या स्कैल्पर्स को फायदा पहुंचाए बिना इसे प्रबंधित करना पूरे उद्योग के लिए एक चुनौती है।"
इस समस्या से निपटने के लिए, पोकेमॉन कंपनी अब वैश्विक रोटेशन की रणनीति अपना रही है। वर्ल्ड चैंपियनशिप को अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ले जाकर—जिसमें अगला गंतव्य सिंगापुर है—वे उम्मीद करते हैं कि मांग का वितरण होगा और अमेरिका के बाहर के प्रशंसकों के लिए यह अधिक सुलभ होगा।
| सिस्टम का प्रकार | लाभ | हानि |
|---|---|---|
| पहले आओ, पहले पाओ | पारदर्शी, त्वरित | सर्वर क्रैश, बॉट्स का दबदबा, कालाबाजारी |
| लॉटरी/इंटरेस्ट लिस्ट | सभी के लिए समान अवसर, स्थिर सर्वर | निराशा की उच्च दर, अनिश्चितता |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पोकेमॉन 'पहले आओ, पहले पाओ' सिस्टम का उपयोग क्यों नहीं करता?
क्रिस ब्राउन के अनुसार, ऐसी प्रणाली से सर्वर क्रैश होने की संभावना अधिक होती है और प्रोफेशनल स्कैल्पर्स बॉट्स का उपयोग करके टिकट हड़प लेते हैं।
अगली पोकेमॉन वर्ल्ड चैंपियनशिप कहाँ आयोजित की जाएगी?
वैश्विक दर्शकों की सेवा करने के प्रयास के तहत अगला आयोजन सिंगापुर में निर्धारित है।