केरल उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि माता-पिता नाबालिग बेटी के यौन शोषण के मामले में समझौता नहीं कर सकते। कोर्ट ने 50 वर्षीय पिता की जमानत याचिका खारिज कर दी, भले ही माँ ने मामले को सुलझाने की कोशिश की थी।
मुख्य बिंदु
- केरल हाईकोर्ट ने 17 वर्षीय बेटी के यौन शोषण के आरोपी पिता की जमानत याचिका खारिज की।
- अदालत ने स्पष्ट किया कि POCSO अपराध 'गैर-शमनीय' (non-compoundable) हैं और इनमें समझौता नहीं हो सकता।
- जज ने माँ द्वारा समझौते की कोशिश को बच्ची के कल्याण की अनदेखी बताया।
केरल उच्च न्यायालय ने बच्चों की सुरक्षा के संबंध में एक कड़ा संदेश दिया है। अदालत ने जोर देकर कहा कि नाबालिग पीड़ित के कानूनी अधिकारों का सौदा माता-पिता द्वारा नहीं किया जा सकता। जस्टिस कौसर एडप्पगाथ ने POCSO मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए मुकदमा चलाने का राज्य का कर्तव्य किसी भी पारिवारिक समझौते से ऊपर है।
यह मामला एक 50 वर्षीय व्यक्ति से जुड़ा है, जिसने अपनी 17 वर्षीय बेटी का तीन महीने तक यौन शोषण किया। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस माँ ने शुरुआत में शिकायत दर्ज कराई थी, उसने बाद में एक हलफनामा दायर कर कहा कि मामला सुलझ गया है और वह अब केस आगे नहीं बढ़ाना चाहती। अदालत ने इस कोशिश को कानून की नजर में पूरी तरह गलत माना।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला 'पेरेंस पैट्रिया' (parens patriae) की अवधारणा को मजबूत करता है, जहाँ अदालत उन लोगों के अंतिम अभिभावक के रूप में कार्य करती है जो अपनी सुरक्षा स्वयं नहीं कर सकते। समझौते को खारिज कर, अदालत ने यह सुनिश्चित किया है कि अपराधी पारिवारिक दबाव या लालच के जरिए न्याय से बच न सकें।
"कानून नाबालिग उत्तरजीवी के माता-पिता या अभिभावकों को यौन शोषण के मामले में आपराधिक कार्यवाही से समझौता करने या उसे वापस लेने की अनुमति नहीं देता है।"
अदालत ने माँ के व्यवहार की तुलना इस मुहावरे से की कि "बाड़ ही खेत को खाने लगी है", जिसका अर्थ है कि जो रक्षक था वही भक्षक बन गया। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी निर्दोष है और समझौता हो चुका है, लेकिन अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या माता-पिता POCSO मामले में आपसी सहमति से समझौता कर सकते हैं?
नहीं, POCSO कानून के तहत यौन अपराधों में समझौता कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
2. 'पेरेंस पैट्रिया' क्षेत्राधिकार क्या होता है?
यह अदालत की वह शक्ति है जिसके तहत वह नाबालिगों या असमर्थ व्यक्तियों के कानूनी अभिभावक के रूप में कार्य करती है।