मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि बलात्कार या यौन शोषण की शिकार महिलाएं 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए अदालत की मंजूरी के बिना चिकित्सा सहायता ले सकती हैं। न्यायालय ने एमटीपी अधिनियम के तहत अधिकारों को सुदृढ़ किया है।

मुख्य बातें

  • 24 सप्ताह तक की गर्भावस्था के लिए कोर्ट की अनुमति अनिवार्य नहीं है।
  • एमटीपी अधिनियम, 1971 के तहत बलात्कार पीड़िता को अधिकार प्राप्त हैं।
  • अदालत ने स्वास्थ्य आयुक्त को अस्पतालों को सूचित करने का निर्देश दिया है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि बलात्कार, यौन शोषण या इनसेस्ट (अगम्यगमन) की शिकार महिलाएं, जिनकी गर्भावस्था 24 सप्ताह तक है, उन्हें गर्भपात कराने के लिए किसी भी न्यायिक प्रक्रिया या अदालत की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

इंदौर स्थित एकल पीठ के न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए की। यह याचिका एक 16 वर्षीय यौन शोषण पीड़िता के पिता द्वारा दायर की गई थी, जो अपनी बेटी की 18 सप्ताह की गर्भावस्था के लिए अदालत की अनुमति मांग रहे थे। न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है क्योंकि कानून पहले से ही स्पष्ट है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय महिलाओं के प्रजनन अधिकारों और मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अक्सर कानूनी जटिलताओं के कारण पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाती, जिससे उनका मानसिक आघात और बढ़ जाता है। न्यायालय का यह रुख प्रक्रियात्मक देरी को समाप्त करता है।

कानूनी प्रक्रियाओं में देरी अक्सर पीड़ितों के लिए न्याय के बजाय नया आघात बन जाती है, यह फैसला उस बाधा को हटाता है।

न्यायालय ने जबलपुर पीठ के 20 फरवरी, 2025 के पूर्व फैसले का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) अधिनियम, 1971 के तहत 24 सप्ताह तक के मामलों में मजिस्ट्रेट या अदालत की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने राज्य के स्वास्थ्य आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे इस निर्णय को सभी सरकारी और निजी अस्पतालों तक पहुंचाएं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति में कोई भ्रम न रहे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इससे पहले, फरवरी 2025 में, जबलपुर की खंडपीठ ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) निर्धारित की थी। इसमें स्पष्ट किया गया था कि 24 सप्ताह से कम की गर्भावस्था के मामलों में चिकित्सा अधिकारियों को किसी भी कानूनी या मजिस्ट्रेट संबंधी दस्तावेज़ की मांग नहीं करनी चाहिए।

क्या आप जानते हैं?: एमटीपी अधिनियम के तहत, गर्भपात का निर्णय लेने के लिए चिकित्सा बोर्ड और कानून के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है, लेकिन बलात्कार के मामलों में प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या 24 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था के लिए कोर्ट की अनुमति चाहिए?
हाँ, 24 सप्ताह से अधिक की अवधि के लिए न्यायिक अनुमति आवश्यक हो सकती है।

2. क्या यह निर्णय केवल मध्य प्रदेश के लिए है?
यह मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का आदेश है, लेकिन यह एमटीपी अधिनियम की व्याख्या पर आधारित है जो पूरे देश में लागू है।