केंद्रीय सरकार ने ड्रग नियमों में संशोधन कर 12% से अधिक एथिल अल्कोहल वाले दवाओं को प्रिस्क्रिप्शन‑ऑनली बना दिया है। यह कदम दवाओं के दुरुपयोग को रोकने और नियामक निगरानी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
भारत सरकार ने उच्च‑शराब वाले औषधियों को अनियंत्रित बिक्री से रोकने के लिए ड्रग नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब 12% वॉल्यूम‑बाय‑वॉल्यूम (v/v) से अधिक एथिल अल्कोहल युक्त दवाओं को Schedule H1 के तहत लाया गया है, जिससे इन्हें केवल पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेचा जा सकेगा।
पृष्ठभूमि
पहले इन दवाओं को Schedule K के तहत एक विशेष छूट मिली थी, जिससे वे लाइसेंस और प्रिस्क्रिप्शन नियंत्रण से बाहर रहती थीं। कई राज्यों ने बताया कि 80% तक अल्कोहल वाले उत्पादों का दुरुपयोग शराब के विकल्प के रूप में हो रहा था, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा था।
मुख्य प्रावधान
नए नियम के तहत 30 ml से अधिक मात्रा में 12% v/v से अधिक एथिल अल्कोहल वाली औषधियों के निर्माण, वितरण और बिक्री के लिए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत लाइसेंस अनिवार्य किया गया है। फार्मेसियों को अब कड़ी रिकॉर्ड‑कीपिंग करनी होगी और केवल डॉक्टर के लिखित प्रिस्क्रिप्शन पर ही इन दवाओं को जारी कर सकेंगी।
फार्मेसी और निर्माताओं पर प्रभाव
यह बदलाव निर्माताओं को अतिरिक्त लाइसेंसिंग प्रक्रिया से गुजरने के लिए मजबूर करेगा, जबकि फार्मेसियों को नई रिपोर्टिंग प्रणाली अपनानी पड़ेगी। हालांकि, यह कदम दवाओं की वैध चिकित्सीय उपयोगिता को बरकरार रखेगा और अनियमित बिक्री के रास्ते बंद करेगा।
व्यापक नियामक संदर्भ
पहले ही आयुर्वेद, सिद्ध और उन्नी जैसी पारम्परिक प्रणालियों में अल्कोहल की सीमा निर्धारित की गई थी (आयुर्वेद एवं सिद्ध में अधिकतम 16%, होम्योपैथी में 12%)। नए संशोधन से Schedule K को इन मौजूदा नियमों के साथ संरेखित किया गया है, जिससे सभी सिस्टम में समान नियामक ढांचा स्थापित हो सके।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
उच्च‑शराब वाले औषधियों का दुरुपयोग न केवल शराब के दुरुपयोग को बढ़ावा देता है, बल्कि गैर‑वैध बाजार में घुसपैठ के नए मार्ग भी खोलता है। इस नियमन से सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ किया जाएगा और भविष्य में समान दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक मजबूत कानूनी मिसाल स्थापित होगी।
भविष्य की संभावनाएँ
केंद्र ने पहले भी प्रेगाबालिन और अन्य दवाओं पर कड़ी निगरानी लागू की है। इस दिशा में निरंतर कदमों से दवाओं के दुरुपयोग को कम करने, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने और नियामक संस्थाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करने की उम्मीद है।