दिल्ली के औखला औद्योगिक क्षेत्र में एक तीन‑मंजिला इमारत में छिपी हुई रिलेबलिंग इकाई ने समाप्ति तिथि वाले ब्रांडेड खाद्य‑पेय को नई तिथियों के साथ बाजार में भेजा। पुलिस की जाँच से पता चला कि ये उत्पाद ई‑कॉमर्स गोदामों तक पहुँच सकते थे, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • औखला में रिलेबलिंग इकाई ने समाप्ति तिथि वाले खाद्य‑पेय को नई तिथियों से बदल दिया।
  • उत्पादों को ई‑कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म के गोदामों तक पहुँचाया गया, संभावित रूप से उपभोक्ताओं तक।
  • सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें 70 वर्षीया मालिक भी शामिल है।

दिल्ली के दक्षिण‑पूर्वी औखला औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक सामान्य‑सी तीन‑मंजिला इमारत में एक रहस्यमयी इकाई ने चार साल तक समाप्ति तिथि वाले ब्रांडेड स्नैक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स और घी को नई लेबल लगाकर बाजार में धकेल दिया। इस इकाई को 12 जून को एक संयुक्त दल ने छापा, जो बाल श्रम की सूचना पर कार्य कर रहा था।

कैसे काम करती थी यह धोखाधड़ी

जांच के अनुसार, अपराधियों ने पहले पैकेजिंग पर मौजूद मूल निर्माण व समाप्ति तिथियों को पतले रसायन से मिटा दिया। फिर हाथ‑से‑चलाने वाले प्रिंटर या समान आकार के स्टिकर से नई तिथियों को चिपका कर उत्पादों को पाँच‑छह महीने तक ‘ताज़ा’ बना दिया। इस प्रक्रिया में थम्स‑अप, फ़ैंटा, बौर्नविटा, हॉरलिक्स, मैगी नूडल्स और पेपर बोट जैसे लोकप्रिय ब्रांड शामिल थे।

सप्लाई चेन और ई‑कॉमर्स का जुड़ाव

संदिग्ध ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और बिहार के 60‑70 थोक विक्रेताओं से निकट‑समाप्ति वाले सामान खरीदे। इन वस्तुओं को फिर औखला के गोदाम में पुनः पैक कर, ई‑कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म के फुलफ़िलमेंट सेंटरों को भेजा गया, जहाँ से वे सीधे ग्राहकों तक पहुँच सकते थे। पुलिस ने कंपनियों को सूचना दे दी है और इस नेटवर्क की पैमाना पता करने की कोशिश कर रही है।

जांच की प्रगति और कानूनी कार्रवाई

रिपैकिंग इकाई के मालिक दर्षन सिंह सचदेवा (७०) सहित सात लोगों को गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता की धारा के तहत दवाबी, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज़ और आपराधिक साज़िश के आरोप में बुक किया गया। कर्मचारियों को लगभग 12,000 रुपये माह का वेतन दिया जाता था, और वे दिन में 8‑10 घंटे काम करते थे। इमारत के मालिक ने बेसमेंट व ग्राउंड फ़्लोर को प्रत्येक एक लाख रुपये प्रति माह किराए पर दिया था।

भविष्य के लिए संकेत

यह मामला न केवल उपभोक्ता सुरक्षा बल्कि ई‑कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म की आपूर्ति श्रृंखला निगरानी की कमी को भी उजागर करता है। नियामक एजेंसियों को अब कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर अंतिम डिलीवरी तक की पूरी ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करनी होगी, ताकि ऐसी घातक धोखाधड़ी फिर न दोहराई जा सके।