भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सॉफ्टवेयर-आधारित चिकित्सा उपकरणों के नियमन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह कदम डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्र में सुरक्षा और स्पष्टता सुनिश्चित करेगा।
मुख्य बातें
- CDSCO ने AI और सॉफ्टवेयर-आधारित मेडिकल उपकरणों के लिए नियामक मार्ग स्पष्ट किया है।
- यह नियम MDR-2017 के तहत सॉफ्टवेयर उत्पादों पर लागू होंगे।
- AI-आधारित निदान और निगरानी उपकरणों को जोखिम श्रेणियों (A, B, C, D) में बांटा जाएगा।
- सामान्य वेलनेस और फिटनेस ट्रैकिंग ऐप्स इस नियम के दायरे से बाहर रहेंगे।
भारत के डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने सॉफ्टवेयर-आधारित चिकित्सा उपकरणों, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सक्षम उत्पादों के नियमन के लिए एक विस्तृत मार्गदर्शन दस्तावेज जारी किया है। यह निर्देश मेडिकल डिवाइसेस रूल्स (MDR), 2017 के तहत काम करेंगे।
इस नए दिशा-निर्देश का मुख्य उद्देश्य निर्माताओं, आयातकों और शोधकर्ताओं को नियामक अनुमोदन के लिए आवेदन तैयार करने में मदद करना है। CDSCO ने स्पष्ट किया है कि यह कोई नया कानून नहीं है, बल्कि मौजूदा नियमों के तहत सॉफ्टवेयर के उपयोग को स्पष्ट करने का एक तरीका है। यह उन सॉफ्टवेयरों पर लागू होगा जो चिकित्सा उद्देश्यों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, लेकिन सामान्य वेलनेस या फिटनेस ट्रैकिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले ऐप्स इससे मुक्त रहेंगे।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि स्वास्थ्य सेवा में सॉफ्टवेयर की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। यह स्पष्टता चिकित्सा जगत में 'सॉफ्टवेयर एज़ ए मेडिकल डिवाइस' (SaMD) और 'सॉफ्टवेयर इन ए मेडिकल डिवाइस' (SiMD) के बीच अंतर स्पष्ट करती है। इससे न केवल मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि नवाचार करने वाली कंपनियों को भी एक निश्चित कानूनी ढांचा मिलेगा।
AI-आधारित नैदानिक उपकरणों के लिए स्पष्ट नियामक मार्ग भविष्य में स्वास्थ्य सेवा में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
नियमों के तहत, AI और मशीन लर्निंग आधारित सॉफ्टवेयर को उनके जोखिम स्तर के आधार पर चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा: क्लास A, B, C और D। उच्च जोखिम वाले उत्पादों की जांच अधिक कड़ाई से की जाएगी। इसके अलावा, कंपनियों को सॉफ्टवेयर डिजाइन, साइबर सुरक्षा और पोस्ट-मार्केट निगरानी जैसे जीवनचक्र चरणों पर ध्यान देना होगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में चिकित्सा उपकरणों का नियमन मुख्य रूप से औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 द्वारा किया जाता है। जैसे-जैसे तकनीक विकसित हुई है, पारंपरिक हार्डवेयर उपकरणों से हटकर अब डिजिटल और सॉफ्टवेयर-आधारित समाधानों को विनियमित करने की आवश्यकता महसूस की गई है, जिसे अब MDR-2017 के माध्यम से लागू किया जा रहा है।
Frequently Asked Questions
1. क्या फिटनेस ट्रैकर (जैसे स्मार्टवॉच) इस नियम के अंतर्गत आते हैं?
नहीं, सामान्य वेलनेस और फिटनेस ट्रैकिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर इस नियम के दायरे में नहीं आते हैं।
2. AI उपकरणों को कैसे वर्गीकृत किया जाएगा?
उन्हें उनके द्वारा उत्पन्न संभावित जोखिम के आधार पर चार श्रेणियों (A, B, C, और D) में वर्गीकृत किया जाएगा।