बच्चेदानी में गांठ, जिसे यूटेरिन फाइब्रॉइड कहा जाता है, महिलाओं में आम है। हार्मोन, जीवनशैली और वंशानुगत कारक इसका कारण बनते हैं, जबकि दवाओं से हल्की गांठें ठीक हो सकती हैं, गंभीर मामलों में ऑपरेशन आवश्यक होता है।
मुख्य बिंदु
- उटरिन फाइब्रॉइड 50 वर्ष तक 70‑80% महिलाओं में विकसित हो सकता है
- एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, मोटापा और तनाव प्रमुख कारण हैं
- दवाओं से हल्की गांठें नियंत्रित, बड़े आकार या भारी रक्तस्राव में सर्जरी आवश्यक
फाइब्रॉइड क्यों बनते हैं?
डॉ. मेघा मित्तल के अनुसार, उटरिन फाइब्रॉइड मुख्यतः महिला हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के असंतुलन से उत्पन्न होते हैं। यह 15‑50 वर्ष की महिलाओं में अधिक प्रचलित है, और यदि परिवार में किसी को यह रोग रहा हो तो जोखिम बढ़ जाता है। मोटापा, निष्क्रिय जीवनशैली, जंक फूड और तनाव भी इन हार्मोन को प्रभावित कर फाइब्रॉइड के विकास को तेज़ करते हैं।
मुख्य लक्षण
गांठ के आकार और स्थान के आधार पर लक्षण बदलते हैं, लेकिन आम लक्षणों में पेट में भारीपन, बार‑बार पेशाब आने, कमर या पेल्विक दर्द, और गर्भधारण में कठिनाई शामिल हैं। कभी‑कभी रक्तस्राव बहुत भारी हो जाता है, जिससे हीमोग्लोबिन स्तर गिर सकता है।
उपचार के विकल्प
यदि गांठ छोटी है और लक्षण हल्के हैं, तो नियमित अल्ट्रासाउंड निगरानी और हल्की दवाओं से रक्तस्राव व दर्द को नियंत्रित किया जाता है। बड़े आकार, लगातार दर्द या गंभीर रक्तस्राव के मामलों में लेज़र, एंबोलाइजेशन या रोबोटिक सर्जरी जैसे न्यूनतम इनवेसिव ऑपरेशन की सलाह दी जाती है। भविष्य में गर्भधारण की चाह रखने वाली महिलाओं के लिए फाइब्रॉइड हटाना प्राथमिकता है, जबकि फुर्सत वाली महिलाओं में पूरी बच्चेदानी हटाने (हिस्टरेक्टॉमी) की संभावना रहती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्राचीन आयुर्वेद में "रसौली" शब्द का उपयोग गर्भाशय की गांठों के लिए किया जाता था, जो आज के फाइब्रॉइड के समान माना जाता है। आयुर्वेदिक ग्रन्थों में इस रोग के उपचार हेतु शारीरिक व्यायाम, हर्बल औषधि और आहार सुधार की सलाह दी गई थी, जो आज के जीवनशैली‑आधारित रोकथाम के सिद्धांतों से मेल खाती है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that rising obesity rates and delayed child‑bearing in urban India are accelerating the prevalence of uterine fibroids, making public awareness and early screening critical for women’s reproductive health.
"बहुत से मामलों में सही दवा और जीवनशैली परिवर्तन से फाइब्रॉइड पूरी तरह नियंत्रण में रह सकते हैं; केवल तभी सर्जरी की जरूरत होती है जब लक्षण जीवन को प्रभावित करने लगते हैं," डॉ. मेघा मित्तल ने कहा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या फाइब्रॉइड हमेशा कैंसर में बदलते हैं?
उत्तर: नहीं, फाइब्रॉइड सामान्यतः सौम्य होते हैं और कैंसर में नहीं बदलते, लेकिन लक्षणों की निगरानी आवश्यक है।
प्रश्न 2: क्या फाइब्रॉइड के कारण हमेशा सर्जरी करनी पड़ती है?
उत्तर: नहीं, छोटे और असिम्प्टोमैटिक फाइब्रॉइड दवाओं व जीवनशैली सुधार से नियंत्रित किए जा सकते हैं; सर्जरी केवल तब आवश्यक होती है जब लक्षण गंभीर हों।