भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कैंसर को एक 'अधिसूचित बीमारी' घोषित करने का निर्देश दिया है, ताकि देश भर में इसके सटीक आंकड़ों और शुरुआती पहचान में सुधार किया जा सके।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने 19 राज्यों को कैंसर को अधिसूचित बीमारी बनाने का सुझाव दिया है।
- सटीक डेटा से कैंसर के भौगोलिक हॉटस्पॉट की पहचान करने में मदद मिलेगी।
- पंजाब और मिजोरम जैसे राज्यों में कैंसर के मामलों में भारी क्षेत्रीय अंतर देखा गया है।
- यह पहल शुरुआती पहचान और बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत में कैंसर की निगरानी प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव आने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने उन 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कैंसर को एक 'अधिसूचित बीमारी' (Notifiable Disease) घोषित करने पर विचार करने का निर्देश दिया है, जिन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है। वर्तमान में, भारत के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पहले ही इस कदम को अपनाया है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य कैंसर के मामलों की रिपोर्टिंग में मौजूद असमानताओं को दूर करना है। भारत में कैंसर का बोझ भौगोलिक रूप से बहुत अलग है; कुछ क्षेत्रों में जोखिम बहुत अधिक है, जबकि अन्य में कम। जब कैंसर को अधिसूचित किया जाता है, तो स्वास्थ्य अधिकारियों के पास डेटा का एक व्यवस्थित प्रवाह होता है, जिससे यह पता चलता है कि किस क्षेत्र में किस प्रकार के कैंसर का खतरा सबसे अधिक है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सटीक डेटा के बिना प्रभावी स्वास्थ्य नीतियां बनाना लगभग असंभव है। जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री (PBCR) शोधकर्ताओं को मृत्यु दर और घटना दर की गणना करने में मदद करती है। ऐतिहासिक रूप से, भारत में रजिस्ट्री कवरेज सीमित और मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों का डेटा छूट जाता है।
कैंसर पंजीकरण केवल मामलों की गिनती नहीं है, बल्कि यह यह समझने का जरिया है कि कौन, कहां और किस दर से बीमार हो रहा है।
डेटा के मौजूदा रुझान चौंकाने वाले हैं। मिजोरम में पुरुषों के लिए जीवनकाल का कैंसर जोखिम 21.1% तक पहुंच गया है। इसी तरह, पंजाब के मालवा क्षेत्र में कैंसर की व्यापकता अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक देखी गई है, जिससे वहां की पर्यावरणीय स्थितियों और कीटनाशकों के उपयोग पर सवाल खड़े होते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम (National Cancer Registry Programme) की शुरुआत 1981 में हुई थी। हालांकि, दशकों बाद भी, पूरे देश में समान डेटा कवरेज प्राप्त करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
| क्षेत्र | कैंसर जोखिम/विशेषता |
|---|---|
| मिजोरम | उच्चतम जीवनकाल जोखिम (21.1% पुरुष) |
| पंजाब (मालवा) | पर्यावरणीय जोखिम के कारण उच्च प्रसार |
| मेघालय (ईस्ट खासी हिल्स) | ग्रासनली (Oesophageal) कैंसर का उच्च स्तर |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. 'अधिसूचित बीमारी' घोषित करने का क्या अर्थ है?
इसका मतलब है कि डॉक्टर या अस्पताल को कैंसर के हर मामले की सूचना सरकार को देनी होगी, जिससे सटीक डेटा मिल सके।
2. इससे मरीजों को क्या फायदा होगा?
इससे सरकार को उन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं और जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी जहां कैंसर का खतरा अधिक है।