एलवी प्रसाद आई इंस्टीट्यूट (LVPEI) के विशेषज्ञों ने 'रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी' (ROP) के प्रति माता-पिता को सतर्क किया है। यह स्थिति समयपूर्व जन्मे और कम वजन वाले शिशुओं में दृष्टि हानि का एक प्रमुख कारण बन सकती है।
- समयपूर्व जन्मे (34 सप्ताह से कम) और कम वजन वाले शिशुओं में ROP का जोखिम अधिक होता है।
- पिछले दशक में ROP सेवाओं की मांग में 10 गुना वृद्धि देखी गई है।
- जन्म के 20-30 दिनों के भीतर आंखों की जांच अनिवार्य है।
- लेजर सर्जरी और इंजेक्शन के माध्यम से दृष्टि को बचाया जा सकता है।
विशाखापत्तनम स्थित विश्व प्रसिद्ध LV प्रसाद आई इंस्टीट्यूट (LVPEI) के नेत्र विशेषज्ञों ने माता-पिता के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है। डॉक्टरों ने रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (ROP) नामक स्थिति के बारे में आगाह किया है, जो समयपूर्व जन्मे (premature) और कम जन्म वजन वाले शिशुओं में दृष्टि के लिए घातक साबित हो सकती है।
चिकित्सकों के अनुसार, ROP तब होता है जब शिशु की रेटिना की रक्त वाहिकाएं पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाती हैं। यह स्थिति बचपन में होने वाले रोके जा सकने वाले अंधापन का एक प्रमुख कारण है। चिंताजनक बात यह है कि LVPEI के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले एक दशक में उनके बाल चिकित्सा नेत्र विज्ञान (paediatric ophthalmology) विभाग में ROP सेवाओं की आवश्यकता में 10 गुना वृद्धि हुई है।
क्यों है यह चिंता का विषय?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक के कारण समयपूर्व जन्मे शिशुओं के जीवित रहने की दर तो बढ़ी है, लेकिन उनके साथ होने वाली जटिलताओं, विशेषकर दृष्टि संबंधी समस्याओं में भी तेजी आई है। ROP का समय पर पता न चलना बच्चे के जीवनभर के लिए अंधेपन का कारण बन सकता है।
समयपूर्व जन्म और कम वजन वाले शिशुओं में आंखों की प्रारंभिक जांच ही उनके भविष्य की दृष्टि सुरक्षित करने का एकमात्र तरीका है।
डॉक्टरों ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं कि जो शिशु 34 सप्ताह के गर्भकाल से पहले पैदा हुए हैं या जिनका वजन दो किलोग्राम से कम है, उनकी जन्म के 20-30 दिनों के भीतर एक प्रशिक्षित नेत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा व्यापक जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा, यदि शिशु का वजन अधिक है लेकिन स्वास्थ्य स्थिति अस्थिर है, तो भी जांच कराना आवश्यक है।
उपचार और बचाव
अच्छी खबर यह है कि यदि ROP का शीघ्र पता चल जाए, तो इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। उपचार के आधुनिक तरीकों में लेजर सर्जरी या anti-VEGF इंजेक्शन शामिल हैं, जो बीमारी को आगे बढ़ने से रोकते हैं और शिशु की दृष्टि को सुरक्षित रखते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: किन शिशुओं के लिए आंखों की जांच अनिवार्य है?
उत्तर: वे शिशु जो 34 सप्ताह से पहले पैदा हुए हों या जिनका वजन 2 किलो से कम हो।
प्रश्न 2: ROP का इलाज क्या है?
उत्तर: लेजर सर्जरी और anti-VEGF इंजेक्शन इसके प्रमुख उपचार हैं।